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Nainital News: यूसीसी बिल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जुलाई को
Thu, 23 Apr 2026 12:58 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:58 AM IST
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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2025 से सरकार द्वारा लागू किए यूसीसी बिल को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए जुलाई माह की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तराखंड जमाते ए उलेमा हिन्द के अध्यक्ष मो.मुकीम निवासी हल्द्वानी, सचिव तंजीम हरिद्वार, सदस्य शोएब अहमद मल्लीताल नैनीताल, मो.शाह नजर देहरादून, अब्दुल सत्तार देहरादून ने यूसीसी के कई प्रावधानों को चुनौती दी थी। इसी तरह एक अन्य रिट देहरादून के नईम अहमद, बिजनौर के हिजाब अहमद, देहरादून के जावेद अख्तर व आकिब कुरैशी के साथ यूसीसी के कुछ प्रावधानों को अधिवक्ता आरुषि गुप्ता ने जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी थी। यही नही भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधानों को जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी थी। जबकि देहरादून के एलमसुद्दीन व अन्य ने रिट याचिका दायर कर यूसीसी को चुनौती दी है। याचिकाओं में कहा गया कि राज्य सरकार ने किसी व्यक्ति विशेष को यह बिल पास करके उनकी व्यक्तिगत संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को हनन करने की अनुमति नही देता। यह उनकी प्राइवेसी का हनन है। इसलिए इसमें सुधार करने की आवश्यकता है।
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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तराखंड जमाते ए उलेमा हिन्द के अध्यक्ष मो.मुकीम निवासी हल्द्वानी, सचिव तंजीम हरिद्वार, सदस्य शोएब अहमद मल्लीताल नैनीताल, मो.शाह नजर देहरादून, अब्दुल सत्तार देहरादून ने यूसीसी के कई प्रावधानों को चुनौती दी थी। इसी तरह एक अन्य रिट देहरादून के नईम अहमद, बिजनौर के हिजाब अहमद, देहरादून के जावेद अख्तर व आकिब कुरैशी के साथ यूसीसी के कुछ प्रावधानों को अधिवक्ता आरुषि गुप्ता ने जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी थी। यही नही भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधानों को जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी थी। जबकि देहरादून के एलमसुद्दीन व अन्य ने रिट याचिका दायर कर यूसीसी को चुनौती दी है। याचिकाओं में कहा गया कि राज्य सरकार ने किसी व्यक्ति विशेष को यह बिल पास करके उनकी व्यक्तिगत संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को हनन करने की अनुमति नही देता। यह उनकी प्राइवेसी का हनन है। इसलिए इसमें सुधार करने की आवश्यकता है।
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