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आपदा तो देखी पर ऐसी जनहानि नहीं देखी
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भीमताल/मुक्तेश्वर (नैनीताल)। रामगढ़ के कई गांवों में आपदा से लोगों का सब कुछ खत्म हो गया है। घर-मकान बह गया है। जो मकान बचे भी हैं तो खंडहर हो गए हैं। किसी में दरारें साफ दिखाई दे रहीं हैं। बगीचे मिट्टी में दब गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 1993 में आपदा का दौर देखा था लेकिन तब जनहानि का ऐसा मंजर नहीं था।
रामगढ़ ब्लॉक की झूतिया के ग्राम प्रधान सुरेश मेर का कहना है कि गांव की सड़क टूटने, बिजली, पानी और नेटवर्क की समस्या होने से पूरी जानकारी प्रशासन के पास नहीं पहुंच पाई। झूतिया में मोहन सिंह और दमयंती देवी का शव बुधवार को बरामद होने के बाद बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम कराया गया। लेकिन गांव से चार किमी दूर स्थित तल्ला रामगढ़ में स्थित शवदाह गृह तक सड़कों के जगह-जगह से टूटने और शवों को उठाने के लिए मजदूर नहीं मिल पाने के साथ ही लकड़ियां नहीं होने से अंत्येष्टि करने में समस्या पैदा हो गई है। प्रधान ने बताया कि तल्ला रामगढ़ के शवदाह गृह में रखी लकड़ियां भी बारिश के बहाव में बह गईं।
50 से अधिक परिवार अन्य जगहों पर गुजार रहे रात
प्रधान के अनुसार गांव की कुल आबादी 2500 के करीब है और 300 परिवार रहते हैं। बारिश के कहर से गांव में 50 से अधिक परिवारों के मकान ध्वस्त और टूटने के कगार पर खड़े हैं। ऐसे में उन परिवारों को अन्य जगह शिफ्ट किया गया है। सभी लोगों के लिए खाने की व्यवस्था भी मिलजुलकर करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों में लाखों रुपये का समान पड़ा है। इससे लोगों में चिंता और मायूसी है।
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एक ही परिवार के तीन शवों को निकाला
प्रधान सुरेश मेर ने बताया कि झूतिया निवासी मोहन राम, उनकी पत्नी दयमंती देवी और बेटा देवेंद्र कुमार 19 अक्तूबर को मकान के साथ बह गए थे। मलबे में दबे तीनों शवों को एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने निकाला। मोहन राम का बड़ा बेटा बृहस्पतिवार को दिल्ली से गांव पहुंचा।
किसानों की 2000 नाली जमीन बही
झूतिया के किसान जीवन सिंह बिष्ट, कुंदन सिंह, चंदन सिंह, हरीश सिंह, मोहन सिंह, थान सिंह, देवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह समेत तमाम किसानों की 2000 से अधिक नाली जमीन बह गई। इस जमीन पर 2000 से अधिक फलदार पौधे नष्ट हो गए।
झूतिया और सुनका में ही हुए पोस्टमार्टम
बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की भवाली, मल्ला रामगढ़ और बीडी पांडे अस्पताल से पहुंची डॉक्टरों की टीम ने झूतिया में दो और सुनका में पांच मजदूरों के शवों का पोस्टमार्टम किया। टीम ने गांव में पहुंचकर पोस्टमार्टम कराया।
लोनिवि की जेसीबी ने नहीं की मदद
प्रधान सुरेश मेर ने बताया कि 19 अक्तूबर को बारिश के बाद क्षेत्र में लोनिवि की दो जेसीबी पहुंची थी लेकिन ऑपरेटरों ने यह कह दिया कि जेसीबी चलाने के लिए ऊपर से आदेश नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा अगर समय से जेसीबी की मदद मिल गई होती तो मलबे में दबे लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे गांव
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के चार दिन बाद भी झूतिया और सकुना में मरे लोगों के परिजनों और ग्रामीणों का हालचाल जानने के लिए जिले से कोई भी उच्च स्तर का अधिकारी गांव नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। ग्रामीणों ने कहा कि तल्ला रामगढ़ पहुंचे सीएम को अधिकारियों ने हालत सामान्य होने की बात बताकर पल्ला झाड़ लिया।
बोहराकोट में भी लोगों के बहे मकान और खेत
रामगढ़ के बोहराकोट गांव में भी मलबे में दबकर शंभूदत्त डालाकोटी और बंसत डालाकोटी मौत हो गई थी। क्षेत्र में 10 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। नंदकिशोर, बहादुर राम, चंद्रप्रकाश, गोविंद सिंह, नारायण दत्त तिवारी, रमेश के घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। प्रधान बसंत शाह ने बताया कि ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बिजली, पानी, सड़क की समस्या का सामना पड़ रहा है।
15 किमी पैदल चलकर सामान ला रहे ग्रामीण
गरमपानी (नैनीताल)। आपदा का मंजर बेतालघाट ब्लॉक क्षेत्र में चार दिन बाद भी देखने को मिल रहा है। सड़कें नहीं खुलने से ग्रामीण 10 से 15 किमी पैदल चलकर खैरना बाजार से सामान लाने को मजबूर हैं। रातीघाट-बेतालघाट मार्ग, खैरना पुल, सूरीफार्म और नौणा में मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से 24 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। बारिश के बाद जर्जर हो चुके रास्तों पर ग्रामीण घोड़े, खच्चर और पैदल सामान ले जाने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीणों की पीड़ा
-भारी बारिश से जाख गांव में खेतीबाड़ी चौपट हो गई है। गांव में 4 मकान ध्वस्त हो गए। मोटर मार्ग और पैदल पुल टूटने से ग्रामीण आठ किमी पैदल बाजार पहुंच रहे हैं। - सुरेंद्र सिंह अधिकारी, जाख
सीम तल्लाकोट मोटर मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। तल्लाकोट, पनौराकोट में 6 मकान खतरे की जद में है। लोग 8 से 10 किमी पैदल आ रहे है। - विनोद ढौडियाल, बीडीसी सदस्य धनियाकोट
शहीद बलवंत सिंह मोटर मार्ग जगह-जगह टूट गया है जिससे क्षेत्रवासियों की परेशानी बढ़ गई है। जरूरी सामान के लिए 10 किलोमीटर तक पैदल आना पड़ रहा है। - पंकज फर्त्याल, नैनीचैक
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रामगढ़ ब्लॉक की झूतिया के ग्राम प्रधान सुरेश मेर का कहना है कि गांव की सड़क टूटने, बिजली, पानी और नेटवर्क की समस्या होने से पूरी जानकारी प्रशासन के पास नहीं पहुंच पाई। झूतिया में मोहन सिंह और दमयंती देवी का शव बुधवार को बरामद होने के बाद बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम कराया गया। लेकिन गांव से चार किमी दूर स्थित तल्ला रामगढ़ में स्थित शवदाह गृह तक सड़कों के जगह-जगह से टूटने और शवों को उठाने के लिए मजदूर नहीं मिल पाने के साथ ही लकड़ियां नहीं होने से अंत्येष्टि करने में समस्या पैदा हो गई है। प्रधान ने बताया कि तल्ला रामगढ़ के शवदाह गृह में रखी लकड़ियां भी बारिश के बहाव में बह गईं।
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50 से अधिक परिवार अन्य जगहों पर गुजार रहे रात
प्रधान के अनुसार गांव की कुल आबादी 2500 के करीब है और 300 परिवार रहते हैं। बारिश के कहर से गांव में 50 से अधिक परिवारों के मकान ध्वस्त और टूटने के कगार पर खड़े हैं। ऐसे में उन परिवारों को अन्य जगह शिफ्ट किया गया है। सभी लोगों के लिए खाने की व्यवस्था भी मिलजुलकर करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों में लाखों रुपये का समान पड़ा है। इससे लोगों में चिंता और मायूसी है।
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एक ही परिवार के तीन शवों को निकाला
प्रधान सुरेश मेर ने बताया कि झूतिया निवासी मोहन राम, उनकी पत्नी दयमंती देवी और बेटा देवेंद्र कुमार 19 अक्तूबर को मकान के साथ बह गए थे। मलबे में दबे तीनों शवों को एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने निकाला। मोहन राम का बड़ा बेटा बृहस्पतिवार को दिल्ली से गांव पहुंचा।
किसानों की 2000 नाली जमीन बही
झूतिया के किसान जीवन सिंह बिष्ट, कुंदन सिंह, चंदन सिंह, हरीश सिंह, मोहन सिंह, थान सिंह, देवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह समेत तमाम किसानों की 2000 से अधिक नाली जमीन बह गई। इस जमीन पर 2000 से अधिक फलदार पौधे नष्ट हो गए।
झूतिया और सुनका में ही हुए पोस्टमार्टम
बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की भवाली, मल्ला रामगढ़ और बीडी पांडे अस्पताल से पहुंची डॉक्टरों की टीम ने झूतिया में दो और सुनका में पांच मजदूरों के शवों का पोस्टमार्टम किया। टीम ने गांव में पहुंचकर पोस्टमार्टम कराया।
लोनिवि की जेसीबी ने नहीं की मदद
प्रधान सुरेश मेर ने बताया कि 19 अक्तूबर को बारिश के बाद क्षेत्र में लोनिवि की दो जेसीबी पहुंची थी लेकिन ऑपरेटरों ने यह कह दिया कि जेसीबी चलाने के लिए ऊपर से आदेश नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा अगर समय से जेसीबी की मदद मिल गई होती तो मलबे में दबे लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे गांव
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के चार दिन बाद भी झूतिया और सकुना में मरे लोगों के परिजनों और ग्रामीणों का हालचाल जानने के लिए जिले से कोई भी उच्च स्तर का अधिकारी गांव नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। ग्रामीणों ने कहा कि तल्ला रामगढ़ पहुंचे सीएम को अधिकारियों ने हालत सामान्य होने की बात बताकर पल्ला झाड़ लिया।
बोहराकोट में भी लोगों के बहे मकान और खेत
रामगढ़ के बोहराकोट गांव में भी मलबे में दबकर शंभूदत्त डालाकोटी और बंसत डालाकोटी मौत हो गई थी। क्षेत्र में 10 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। नंदकिशोर, बहादुर राम, चंद्रप्रकाश, गोविंद सिंह, नारायण दत्त तिवारी, रमेश के घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। प्रधान बसंत शाह ने बताया कि ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बिजली, पानी, सड़क की समस्या का सामना पड़ रहा है।
15 किमी पैदल चलकर सामान ला रहे ग्रामीण
गरमपानी (नैनीताल)। आपदा का मंजर बेतालघाट ब्लॉक क्षेत्र में चार दिन बाद भी देखने को मिल रहा है। सड़कें नहीं खुलने से ग्रामीण 10 से 15 किमी पैदल चलकर खैरना बाजार से सामान लाने को मजबूर हैं। रातीघाट-बेतालघाट मार्ग, खैरना पुल, सूरीफार्म और नौणा में मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से 24 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। बारिश के बाद जर्जर हो चुके रास्तों पर ग्रामीण घोड़े, खच्चर और पैदल सामान ले जाने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीणों की पीड़ा
-भारी बारिश से जाख गांव में खेतीबाड़ी चौपट हो गई है। गांव में 4 मकान ध्वस्त हो गए। मोटर मार्ग और पैदल पुल टूटने से ग्रामीण आठ किमी पैदल बाजार पहुंच रहे हैं। - सुरेंद्र सिंह अधिकारी, जाख
सीम तल्लाकोट मोटर मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। तल्लाकोट, पनौराकोट में 6 मकान खतरे की जद में है। लोग 8 से 10 किमी पैदल आ रहे है। - विनोद ढौडियाल, बीडीसी सदस्य धनियाकोट
शहीद बलवंत सिंह मोटर मार्ग जगह-जगह टूट गया है जिससे क्षेत्रवासियों की परेशानी बढ़ गई है। जरूरी सामान के लिए 10 किलोमीटर तक पैदल आना पड़ रहा है। - पंकज फर्त्याल, नैनीचैक