हल्द्वानी हिंसा: भले हमारी जान चली जाएगी...किसी भी हाल में आप लोगों को बचाएंगे, एक परिवार बना ढाल; आपबीती
हल्द्वानी हिंसा में कई कर्मचारी फंस गए थे। इसमें कई कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। ऐसे में कर्मचारियों ने एक परिवार से मदद मांगी और इसके बाद परिवार ने उन्हें घर में सुरक्षित किया। सुनिए पुलिसकर्मियों की आपबीती...
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आठ फरवरी को बनभूलपुरा में उपद्रव के दौरान कई कर्मचारी फंस गए थे। इसमें कई कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। ऐसे चार कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एक परिवार ढाल बना और घंटों तक अपने घर में सुरक्षित रखा।
मलिक के बगीचा में अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई को शुरू करने की योजना बनी थी। उसमें अन्य विभागों के साथ राजस्व कर्मी भी पहुंचे थे। इसमें राजस्व उप निरीक्षक(लेखपाल) सुनीता लोहनी भी शामिल थी।
उन्होंने बताया कि अभियान शुरू होने के कुछ दूर बाद उपद्रव शुरू हो गया। इसके बाद टीम उपद्रव वाले स्थल से हटने लगी। हम घटनास्थल से कुछ दूरी पर पहुंचे, उस वक्त हर तरफ पथराव और आगजनी हो रही थी। आगे जाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हमारे साथ दो राजस्व और पुलिस कर्मी था।
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ऐसे में हमने एक परिवार से मदद मांगने का फैसला किया। उनके घर पर दस्तक दी। सुरक्षा की गुहार लगाई, इसके बाद परिवार ने हम लोगों को अपने घर में सुरक्षित किया। उन्होंने सुरक्षा का भरोसा देने के साथ कहा कि भले हमारी जान चली जाएगी... लेकिन भी किसी भी हाल में हम आप लोगों को बचाएंगे। उन्होंने हमारी काफी मदद की है।