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खटीमा ब्लॉक प्रमुख को शासन ने किया निलंबित
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खटीमा। वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों से घिरे ब्लॉक प्रमुख रंजीत सिंह नामधारी को संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने निलंबित कर दिया है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग के निदेशक बंशीधर तिवारी की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि निदेशक बंशीधर तिवारी की ओर से जारी आदेश के तहत जमौर भिलैया के बीडीसी सदस्य के शिकायती पत्र के आधार पर संयुक्त जांच समिति बनाई गई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि ब्लॉक प्रमुख नामधारी को वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। इसके लिए 17 मई को नोटिस तामील कराया गया था लेकिन निर्धारित समयावधि पर उन्होंने अपना तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि डीएम ऊधमसिंह नगर की रिपोर्ट में जिन आरोपों की पुष्टि की गई है वे गंभीर हैं। ऐसे में उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम के अनुसार अंतिम जांच पूर्ण होने तक रंजीत सिंह नामधारी को ब्लॉक प्रमुख खटीमा के पद से निलंबित किया गया है।
ब्लॉक प्रमुख रंजीत सिंह नामधारी का कहना है कि पंचायती राज विभाग की ओर से मुझे 17 मई को नोटिस तामील कराया गया था, जिसका जवाब साक्ष्यों के साथ 30 मई को निदेशालय को भेज दिया गया है। निलंबन का आदेश अभी नहीं मिला है।
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पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि निदेशक बंशीधर तिवारी की ओर से जारी आदेश के तहत जमौर भिलैया के बीडीसी सदस्य के शिकायती पत्र के आधार पर संयुक्त जांच समिति बनाई गई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि ब्लॉक प्रमुख नामधारी को वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। इसके लिए 17 मई को नोटिस तामील कराया गया था लेकिन निर्धारित समयावधि पर उन्होंने अपना तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि डीएम ऊधमसिंह नगर की रिपोर्ट में जिन आरोपों की पुष्टि की गई है वे गंभीर हैं। ऐसे में उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम के अनुसार अंतिम जांच पूर्ण होने तक रंजीत सिंह नामधारी को ब्लॉक प्रमुख खटीमा के पद से निलंबित किया गया है।
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ब्लॉक प्रमुख रंजीत सिंह नामधारी का कहना है कि पंचायती राज विभाग की ओर से मुझे 17 मई को नोटिस तामील कराया गया था, जिसका जवाब साक्ष्यों के साथ 30 मई को निदेशालय को भेज दिया गया है। निलंबन का आदेश अभी नहीं मिला है।
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