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Nainital News: विश्वविद्यालय की अकादमिक उन्नति के लिए बेहतर शोध सबसे अहम
Sat, 15 Nov 2025 02:56 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 15 Nov 2025 02:56 AM IST
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी की ओर से आयोजित दो दिवसीय शोध पद्धति एवं शैक्षणिक लेखन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। विषय विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक उन्नति के लिए बेहतर शोध सबसे अहम हैं।
शुक्रवार को प्रथम सत्र में आईआईटी रुड़की के प्रो. मनु गुप्ता ने “डेटा संग्रहण एवं सेंपलिंग तकनीक” की जानकारी दी। उन्होंने शोध में डेटा की महत्ता के बारे में बताया। द्वितीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. जेएन सिन्हा ने कहा कि शोध विषय वही चुनना चाहिए जिसमें शोधार्थी की वास्तविक रुचि हो। उन्होंने प्रभावी लेखन शैली के लिए सरल भाषा, छोटे वाक्यों, स्पष्ट तर्क, संगत अध्याय संरचना सरीखी अंतरराष्ट्रीय नियमावली के उपयोग पर बल दिया। इसके अलावा प्रकाशक चयन, रॉयल्टी, संपादन एवं पुस्तक प्रस्ताव के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए।
मुख्य अतिथि प्रो. दिव्या यू जोशी ने शोध पद्धति, भाषा कौशल, संदर्भ प्रबंधन एवं शैक्षणिक ईमानदारी के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रीतेश साह ने विषय विशेषज्ञों के कथन को दोहराया कि किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक उन्नति उच्च गुणवत्ता वाले शोध और मजबूत कार्यप्रणाली पर आधारित होती है। इस मौके पर इसमें डॉ. नंदन सिंह, डॉ. हर्ष चौहान, डॉ. सरोज, डॉ अशोक उप्रेती, डॉ सुरेश जोशी, डॉ. ऋचा गिनवाल, डॉ. दिलीप आदि रहे। संवाद
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शुक्रवार को प्रथम सत्र में आईआईटी रुड़की के प्रो. मनु गुप्ता ने “डेटा संग्रहण एवं सेंपलिंग तकनीक” की जानकारी दी। उन्होंने शोध में डेटा की महत्ता के बारे में बताया। द्वितीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. जेएन सिन्हा ने कहा कि शोध विषय वही चुनना चाहिए जिसमें शोधार्थी की वास्तविक रुचि हो। उन्होंने प्रभावी लेखन शैली के लिए सरल भाषा, छोटे वाक्यों, स्पष्ट तर्क, संगत अध्याय संरचना सरीखी अंतरराष्ट्रीय नियमावली के उपयोग पर बल दिया। इसके अलावा प्रकाशक चयन, रॉयल्टी, संपादन एवं पुस्तक प्रस्ताव के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए।
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मुख्य अतिथि प्रो. दिव्या यू जोशी ने शोध पद्धति, भाषा कौशल, संदर्भ प्रबंधन एवं शैक्षणिक ईमानदारी के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रीतेश साह ने विषय विशेषज्ञों के कथन को दोहराया कि किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक उन्नति उच्च गुणवत्ता वाले शोध और मजबूत कार्यप्रणाली पर आधारित होती है। इस मौके पर इसमें डॉ. नंदन सिंह, डॉ. हर्ष चौहान, डॉ. सरोज, डॉ अशोक उप्रेती, डॉ सुरेश जोशी, डॉ. ऋचा गिनवाल, डॉ. दिलीप आदि रहे। संवाद
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