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एनस्थीसिया की दवा दे रही नशा
ब्यूरो /अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल)।
Updated Thu, 10 Dec 2015 01:05 AM IST
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गोलियां, डायल्यूटर और कफ सीरप ही नहीं पेन किलर के इंजेक्शन एवं एनस्थीसिया की दवाएं भी नशे के काम आ रही हैं। मानसिक संतुष्टि के लिए युवा पीढ़ी पेन किलर के इंजेक्शन और एनस्थीसिया की दवाओं का नशे में प्रयोग कर रहे हैं। बच्चों-युवाओं में बदलाव महसूस हो रहा है तो उससे बात करें और चिकित्सक से परामर्श लें।
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बच्चे और युवा नशे की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। हाईक्लास सोसायटी के बच्चों-युवाओं को देखकर अनुसरण करते हैं। 13 से 19 वर्ष के बच्चों-युवाओं में उत्सुकता ज्यादा होती है। ऐसे में एक बार नशा करने का प्रयास करते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के मनोविज्ञानी डा. युवराज पंत का कहना है कि बच्चों-युवाओं में अगर बदलाव दिखाई देता है तो उनकी निगरानी करें।
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बच्चे का स्कूल बैग चेक करने के साथ ही स्कूल और कोचिंग में जाकर उसकी प्रगति के बारे में पूछे। साथ ही इवेंट या किताब के नाम पर अगर बच्चे ने रुपये लिए है तो पूरी जानकारी लें। बच्चों से बैठकर बात करें और एक साथ ही बैठकर खाना खाएं।
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खाने के वक्त बच्चा आपको पूरे दिनचर्या बता सके। व्यस्त जीवन शैली में माता-पिता को बच्चे को पर्याप्त समय देना चाहिए। बच्चों को हर हाल में आउटडोर एक्टिविटी (खेल या व्यायाम) में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। डा. पंत ने कहा कि अगर बच्चे में कोई लक्षण हैं तो छुपाने की बजाए डाक्टर से संपर्क करें। साइको थैरेपी काउंसलिंग से बच्चों-युवाओं को नशे की लत से दूर किया जा सकता है।