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राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ ले आम जनता और स्टेक होल्डर्स: सुबीर कुमार
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नैनीताल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुबीर कुमार ने आम जनता और स्टेक होल्डर्स का आह्वान किया है कि वह नौ मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में हिस्सा लें।
प्राधिकरण के अध्यक्ष सुबीर कुमार शनिवार को यहां जिला जजी परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के आयोजन में नौ मार्च को नैनीताल, हल्द्वानी और रामनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सिविल मामले, बैंक लोन रिकवरी के मामले, बीमा संबंधित, मोटर दुर्घटना संबंधित, पारिवारिक वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस मामले, श्रम, राजस्व व बिजली पानी से संबंधित विवाद, मोटर वाहन चालान और शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलों का सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर वाद निस्तारित होने की स्थिति में सिविल वादों में अदा की गई कोर्ट फीस के वापसी का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय लोक अदालत में मामले पक्षगण की आपसी सहमति से निस्तारित किए जाते हैं। लिहाजा इसमें अग्रेतर लिटिगेशन व अपील आदि में होने वाले समय एवं खर्च से भी बचा जा सकता है। बताया कि अब तक प्री-लीटिगेशन एवं लंबित कुल 4200 मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए अब तक नियत किया जा चुका है।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष सुबीर कुमार शनिवार को यहां जिला जजी परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के आयोजन में नौ मार्च को नैनीताल, हल्द्वानी और रामनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सिविल मामले, बैंक लोन रिकवरी के मामले, बीमा संबंधित, मोटर दुर्घटना संबंधित, पारिवारिक वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस मामले, श्रम, राजस्व व बिजली पानी से संबंधित विवाद, मोटर वाहन चालान और शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलों का सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर वाद निस्तारित होने की स्थिति में सिविल वादों में अदा की गई कोर्ट फीस के वापसी का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय लोक अदालत में मामले पक्षगण की आपसी सहमति से निस्तारित किए जाते हैं। लिहाजा इसमें अग्रेतर लिटिगेशन व अपील आदि में होने वाले समय एवं खर्च से भी बचा जा सकता है। बताया कि अब तक प्री-लीटिगेशन एवं लंबित कुल 4200 मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए अब तक नियत किया जा चुका है।
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