प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांडः पुलिस के हत्थे चढ़ा भुप्पी का मुख्य हत्यारोपी गौरव गुप्ता
पुलिस की टीम ने भुप्पी हत्याकांड के मुख्य आरोपी गौरव गुप्ता को पकड़ लिया है। हालांकि पुलिस इस संबंध में कुछ भी बताने को तैयार नहीं लेकिन ये भी पता चला है कि गौरव गुप्ता यूपी के किसी माननीय के संरक्षण में था। इस बारे में पूछने पर एसएसपी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
भूपेंद्र उर्फ भुप्पी पांडे की हत्या के बाद आरोपी त्रिलोक नगर निवासी सौरभ गुप्ता को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया था। घटनास्थल से सौरभ का भाई गौरव फरार हो गया था। वही इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। आरोपी को पकड़ने के लिए एसएसपी ने पुलिस की छह टीमें लगाईं थीं। एक टीम ने दिल्ली में डेरा डाला हुआ था। दूसरी टीम आगरा और मैनपुरी की तरफ गई थी। मैनपुरी में ही गुप्ता बंधुओं का पैतृक आवास बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार गौरव गुप्ता ने हल्द्वानी से फरार होने के बाद यूपी में किसी माननीय (विधायक बताया जा रहा) के यहां शरण ली थी। इधर पुलिस ने गौरव गुप्ता के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया था। इससे उसके छिपने का ठिकाना पता लगने पर पुलिस उसके नजदीक पहुंची तो माननीय के करीबियों ने उसे सरेंडर करा दिया।
इस बारे में पूछने के लिए एसएसपी को कई बार कॉल किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका। देर रात तक मुख्य आरोपी को जिले में लाए जाने की संभावना है। स्थानीय पुलिस कर्मियों का कहना है कि इस मामले में बुधवार को खुलासा किया जाएगा। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने जौनपुर और कुछ लोगों ने मैनपुरी से पकड़ने की खबरें पोस्ट की हैं।
निकाल लिया था सिम
पुलिस सूत्रों के अनुसार हत्यारोपी गौरव गुप्ता ने वारदात के बाद अपने मोबाइल से सिम निकाल लिया था लेकिन वह सर्विलांस की तकनीकी से बच नहीं सका। वह मोबाइल में दूसरा सिम लगाकर इस्तेमाल कर रहा था। पहले वह मोबाइल बंद कर पुलिस को चकमा देता रहा लेकिन दूसरे सिम का इस्तेमाल करते ही सर्विलांस की जद में आ गया।
आखिर भाग कैसे निकला गौरव
रविवार को शहर के व्यस्त चौराहे पर पुलिस की मौजूदगी में भुप्पी की हत्या के बाद गौरव गुप्ता मौके से फरार हुआ। पुलिस की चौकसी का हाल ये है कि वह परिवार को लेकर गाड़ी से शहर पार कर भाग गया लेकिन दिनदहाड़े इतने बड़े कांड के बाद भी पुलिस ने नाके लगाने की जहमत या तो उठाई ही नहीं या तो फिर गौरव पहले से ही इतनी तैयारी कर आया था कि वह वारदात को अंजाम देकर बिना अवरोध के परिवार समेत भाग निकला।
कुछ तो है दाल में काला
भुप्पी हत्याकांड में कुछ तो दाल में काला है। भुप्पी और उसका साथी रोहित सागर पुलिस चौकी में गुप्ता बंधुओं पर कार्रवाई न होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर चौकी से बाहर आते हैं और कुछ ही देर में सरेराह भुप्पी को गोलियों से भून दिया जाता है। संयोग देखिए, जिस कोतवाल पर कातिलों से मिलीभगत के आरोप लगे हैं, वह दो दिन पहले से अवकाश पर होता है।
आरोपियों की दुकान के आगे से भुप्पी पहले भी कई बार गुजरा लेकिन तब कहीं कोई टकराव नहीं हुआ लेकिन पुलिस चौकी में शिकायत के बाद ही इस तरह का सनसनीखेज हत्याकांड अंजाम दिया जाना भी मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। कोई न कोई है, जिसने गुप्ता बंधुओं को भुप्पी की गतिविधियों की जानकारी दी। वह कौन है, जांच के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है।
पुलिस की साख पुलिस अफसरों के हाथ
भुप्पी हत्याकांड से पुलिस की साख सवालों के घेरे में है। मृतक के परिजनों, परिचितों समेत सोशल मीडिया पर भी पुलिस की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया जा रहा हैै। पुलिस, रसूखदारों, मंत्रियों से आरोपियों की करीबी फोटोग्राफ्स और दूसरे माध्यमों से दर्शाई जा रही है। पुलिस की इस मामले में हर तरह से बरती ढिलाई ने भी कई सवालों को जन्म दिया है।
इतने बड़े हादसे के बाद भी पुलिस नहीं चेती। हत्यारोपियों पर गैंगस्टर जैसी धारा न लगाने से भी उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब पुलिस की साख बचाने की जिम्मेदारी पुलिस के ही आला अधिकारियों पर है। पुलिस अब भी पूरी निष्पक्षता से जांच कर सच्चाई को जनता के सामने लाए तो ही पुलिस पर लगा ये धब्बा मिट सकता है।
हत्याकांडों के चलते तीन कोतवालों को गंवानी पड़ी कुर्सी
शहर में सनसनीखेज हत्याकांडों के चलते तीन कोतवालों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। वर्तमान कोतवाल रहे विक्रम राठौर पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप उच्चाधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार विक्रम राठौर को हल्द्वानी कोतवाली की कमान 13 सितंबर 2018 को मिली थी। भुप्पी हत्याकांड के बाद अभियुक्तों से मिलीभगत का आरोप लगने और शव रखकर थाने में प्रदर्शन करने पर एसएसपी ने विक्रम राठौर को लाइन हाजिर कर दिया और कोतवाल को निलंबित करने की संस्तुति डीआईजी को भेजी है। केआर पांडे 30 जून 2017 से लेकर 12 सितंबर 2018 तक कोतवाल रहे। गोरापड़ाव में हुई महिला की हत्या और लूट के मामले का खुलासा करने में विफल होने पर उन्हें एसएसपी ने हटाया था।
निरीक्षक नरेश चौहान 16 मई 2017 को हल्द्वानी के कोतवाल नियुक्त हुए थे लेकिन निर्वाण संस्था से एक मरीज के भागने और उसकी हत्या होने पर उच्चाधिकारी नाराज हो गए। डीजीपी के आदेश पर कोतवाल नरेश चौहान को 30 जून 17 को हटाया गया था। कोतवाल रहे राजेंद्र सिंह ह्यांकी के कार्यकाल में पंकज खंडेलवाल की हत्या की गई थी। बवाल के बाद 2006 में राजेंद्र सिंह ह्यांकी को एसएसपी ने हटाया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसटीएफ के तत्कालीन निरीक्षक दिनेश चंद्र ढौडियाल को तैनात किया गया था।
डीआईजी ने सात दिन में लापरवाही की मांगी रिपोर्ट
डीआईजी ने भुप्पी हत्याकांड के मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट सात दिन में देनी होगी। इसी के आधार पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। डीआईजी जगतराम जोशी ने बताया कि आम जनता ने भुप्पी हत्याकांड के मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसएसपी सुनील कुमार मीणा के सामने भी लोगों ने पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत का आरोप लगाया था। एसएसपी ने एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव को घटना में संलिप्त पुलिसकर्मियों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है।