{"_id":"64f0f7414f473511900ba505","slug":"free-travel-facility-not-available-on-many-routes-haldwani-news-c-337-1-ha11004-480-2023-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: कई रूटों पर बे-असर रही मुफ्त सफर की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: कई रूटों पर बे-असर रही मुफ्त सफर की सुविधा
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी। रक्षाबंधन पर भाइयों को राखी बांधने जाने के लिए प्रदेश सरकार ने रोडवेज बसों में बहनों के लिए मुफ्त सफर की सुविधा दी, लेकिन पहाड़ के रूटों पर बहनों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका। इसकी वजह यह है कि जिले के कई पर्वतीय रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलती हैं। उन्हें प्राइवेट टैक्सी या केमू की बस का सहारा लेना पड़ा।
यूपी के समय कई पर्वतीय मार्गों पर रोडवेज बस की सुविधा थी। उत्तराखंड बनने के बाद परिवहन निगम ने मार्गों को कम करना शुरू कर दिया। नतीजा यह है कि धीरे-धीरे मुख्य मार्गों को छोड़कर अन्य मार्गों पर रोडवेज बस का संचालन बंद कर दिया गया। अब लोग इन मार्गों पर जाने के लिए प्राइवेट टैैक्सी और केमू की बस पर ही निर्भर हैं। केमू ने कई अन्य पर्वतीय मार्गों पर बस चलाने की इजाजत मांगी है जो सालों से लंबित पड़ी है। उल्लेखनीय है कि रोडवेज के बाद केमू बस सेवा यात्रियों के लिए कम खर्चीली होती है।
हल्द्वानी से इन मार्गों पर बंद है बस सेवा
-लमगड़ा पोदार
-देवीधूरा-लोहाघाट
-दूनागिरी
-पतलोट-खनस्यू
-सुनकिया
-सिमलखेत
-- -- --
अनुबंधित लाभ वाले मार्गों पर
हल्द्वानी। परिवहन निगम में नैनीताल परिमंडल में हल्द्वानी डिपो को छोड़कर अन्य डिपो घाटे में ही रहते हैं। भवाली, नैनीताल, रुद्रपुर, रामनगर, अल्मोड़ा आदि डिपो घाटे में चलते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जो डिपो घाटे में रहते हैं। परिवहन निगम से जुड़े कर्मचारी संगठन के नेता बताते हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में अगर बंद पड़े मार्गों को फिर से खोल दिया जाए तो परिवहन निगम ये डिपो भी फायदे में आ सकते हैं। सवारियां तो हैं लेकिन रोडवेज के पास बस नहीं हैं।
विज्ञापन
-- --
पहाड़ पर चलने वाली बस की कमी
हल्द्वानी। काठगोदाम डिपो के पास पहाड़ में चलाने के लिए 27 और हल्द्वानी डिपो के पास 20 बस हैं। हल्द्वानी बस स्टेशन से पहाड़ के लिए 47 बसें ही संचालित होतीं हैं। मुख्यत: बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल रूट पर ही रोडवेज बस चलतीं हैं। इनके अलावा अन्य मार्गों पर रोडवेज बस की कमी है। हल्द्वानी एआरएम सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पहाड़ के लिए जितनी बस हैं, उनसे सेवाएं दी जातीं हैं। बस की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
पहाड़ पर चलती है 34 सीटर बस
हल्द्वानी। मैदानी इलाकों में 37 सीटर से ऊपर की बसें चलाई जातीं हैं लेकिन पहाड़ पर केवल 34 सीटर बस ही चलती है। हालांकि अभी परिवहन विभाग ने शासन में रिपोर्ट में भेजी है कि एक निजी कपंनी की बस जो 37 सीटर है उसे पहाड़ पर चलाया जा सकता है। इस कंपनी की बस का परीक्षण पहाड़ में किया जा चुका है।
केमू भी कर रहा मार्ग विस्तार की मांग
हल्द्वानी। केमू भी मार्ग विस्तार की मांग उठा रहा है। खासतौर से नैनीताल, टनकपुर, धारचूला रूट पर केमू अपनी बस सेवाओं को बढ़ाने की मांग करता है। केमू अध्यक्ष सुरेश डसीला ने कहा कि परिवहन निगम के अलावा केमू की पहाड़ के लोगों को सस्ती यात्रा उपलब्ध करवाता है।
ओखलकांडा ब्लॉक की बहनों को भी नहीं मिला सरकारी सुविधा का लाभ
नैनीताल। ओखलकांडा ब्लाक की बहनें रक्षाबंधन पर मुफ्त सफर का लाभ नहीं उठा सकीं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां अधिकतर रूटों पर रोडवेज की बसें चलती ही नहीं हैं। ऐसे में बहनों ने भाइयों के घर तक पहुंचने के लिए टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लिया। ओखलकांडा ब्लॉक के देवली-पतलोट, पतलोट-गौनियारों, ओखलकांडा-ढोलीगांव समेत अन्य रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यहां की महिलाएं इस लाभ से वंचित रही। इस संबंध में भवाली डिपो इंचार्ज जीवन कुमार ने बताया कि स्टाफ व बसों की कमी से चलते ओखलकांडा ब्लाक के रूट पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता है।
चालक नहीं होने से एक माह से बंद है मुक्तेश्वर रूट
भवाली। भवाली डिपो की ओर से रक्षाबंधन पर 14 बसों के साथ दो अतिरिक्त बसे संचालित की गई। लेकिन मुक्तेश्वर मार्ग पर संचालित होने वाली रोडवेज बस में चालक नहीं होने के चलते बस का संचालन एक महीने से बंद पड़ा हुआ है। इससे मुक्तेश्वर, रामगढ़, गागर समेत अन्य क्षेत्रों के ग्रामीण, स्कूली बच्चे और कर्मचारी परेशान हैं। बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन पर महिलाओं को अपने मायके जाने के लिए निजी वाहनों में अधिक किराया देने के साथ ही भवाली चौराहे पर वाहन का इंतजार करना पड़ा। भवाली डिपो की ओर से 14 मार्गों पर बस संचालित की जाती है। भवाली डिपो के एआरएम मोहन राम ने बताया कि चालक नहीं होने से मुक्तेश्वर मार्ग पर बस का संचालन नहीं हो पा रहा है। जल्द ही इस मार्ग पर बस संचालित की जाएगी। रक्षाबंधन पर अतिरिक्त बसें चलाई गईं जिसका लाभ महिला यात्रियों को मिला।
विज्ञापन
हल्द्वानी। रक्षाबंधन पर भाइयों को राखी बांधने जाने के लिए प्रदेश सरकार ने रोडवेज बसों में बहनों के लिए मुफ्त सफर की सुविधा दी, लेकिन पहाड़ के रूटों पर बहनों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका। इसकी वजह यह है कि जिले के कई पर्वतीय रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलती हैं। उन्हें प्राइवेट टैक्सी या केमू की बस का सहारा लेना पड़ा।
यूपी के समय कई पर्वतीय मार्गों पर रोडवेज बस की सुविधा थी। उत्तराखंड बनने के बाद परिवहन निगम ने मार्गों को कम करना शुरू कर दिया। नतीजा यह है कि धीरे-धीरे मुख्य मार्गों को छोड़कर अन्य मार्गों पर रोडवेज बस का संचालन बंद कर दिया गया। अब लोग इन मार्गों पर जाने के लिए प्राइवेट टैैक्सी और केमू की बस पर ही निर्भर हैं। केमू ने कई अन्य पर्वतीय मार्गों पर बस चलाने की इजाजत मांगी है जो सालों से लंबित पड़ी है। उल्लेखनीय है कि रोडवेज के बाद केमू बस सेवा यात्रियों के लिए कम खर्चीली होती है।
विज्ञापन
हल्द्वानी से इन मार्गों पर बंद है बस सेवा
-लमगड़ा पोदार
-देवीधूरा-लोहाघाट
-दूनागिरी
-पतलोट-खनस्यू
-सुनकिया
-सिमलखेत
अनुबंधित लाभ वाले मार्गों पर
हल्द्वानी। परिवहन निगम में नैनीताल परिमंडल में हल्द्वानी डिपो को छोड़कर अन्य डिपो घाटे में ही रहते हैं। भवाली, नैनीताल, रुद्रपुर, रामनगर, अल्मोड़ा आदि डिपो घाटे में चलते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जो डिपो घाटे में रहते हैं। परिवहन निगम से जुड़े कर्मचारी संगठन के नेता बताते हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में अगर बंद पड़े मार्गों को फिर से खोल दिया जाए तो परिवहन निगम ये डिपो भी फायदे में आ सकते हैं। सवारियां तो हैं लेकिन रोडवेज के पास बस नहीं हैं।
विज्ञापन
पहाड़ पर चलने वाली बस की कमी
हल्द्वानी। काठगोदाम डिपो के पास पहाड़ में चलाने के लिए 27 और हल्द्वानी डिपो के पास 20 बस हैं। हल्द्वानी बस स्टेशन से पहाड़ के लिए 47 बसें ही संचालित होतीं हैं। मुख्यत: बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल रूट पर ही रोडवेज बस चलतीं हैं। इनके अलावा अन्य मार्गों पर रोडवेज बस की कमी है। हल्द्वानी एआरएम सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पहाड़ के लिए जितनी बस हैं, उनसे सेवाएं दी जातीं हैं। बस की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
पहाड़ पर चलती है 34 सीटर बस
हल्द्वानी। मैदानी इलाकों में 37 सीटर से ऊपर की बसें चलाई जातीं हैं लेकिन पहाड़ पर केवल 34 सीटर बस ही चलती है। हालांकि अभी परिवहन विभाग ने शासन में रिपोर्ट में भेजी है कि एक निजी कपंनी की बस जो 37 सीटर है उसे पहाड़ पर चलाया जा सकता है। इस कंपनी की बस का परीक्षण पहाड़ में किया जा चुका है।
केमू भी कर रहा मार्ग विस्तार की मांग
हल्द्वानी। केमू भी मार्ग विस्तार की मांग उठा रहा है। खासतौर से नैनीताल, टनकपुर, धारचूला रूट पर केमू अपनी बस सेवाओं को बढ़ाने की मांग करता है। केमू अध्यक्ष सुरेश डसीला ने कहा कि परिवहन निगम के अलावा केमू की पहाड़ के लोगों को सस्ती यात्रा उपलब्ध करवाता है।
ओखलकांडा ब्लॉक की बहनों को भी नहीं मिला सरकारी सुविधा का लाभ
नैनीताल। ओखलकांडा ब्लाक की बहनें रक्षाबंधन पर मुफ्त सफर का लाभ नहीं उठा सकीं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां अधिकतर रूटों पर रोडवेज की बसें चलती ही नहीं हैं। ऐसे में बहनों ने भाइयों के घर तक पहुंचने के लिए टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लिया। ओखलकांडा ब्लॉक के देवली-पतलोट, पतलोट-गौनियारों, ओखलकांडा-ढोलीगांव समेत अन्य रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यहां की महिलाएं इस लाभ से वंचित रही। इस संबंध में भवाली डिपो इंचार्ज जीवन कुमार ने बताया कि स्टाफ व बसों की कमी से चलते ओखलकांडा ब्लाक के रूट पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता है।
चालक नहीं होने से एक माह से बंद है मुक्तेश्वर रूट
भवाली। भवाली डिपो की ओर से रक्षाबंधन पर 14 बसों के साथ दो अतिरिक्त बसे संचालित की गई। लेकिन मुक्तेश्वर मार्ग पर संचालित होने वाली रोडवेज बस में चालक नहीं होने के चलते बस का संचालन एक महीने से बंद पड़ा हुआ है। इससे मुक्तेश्वर, रामगढ़, गागर समेत अन्य क्षेत्रों के ग्रामीण, स्कूली बच्चे और कर्मचारी परेशान हैं। बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन पर महिलाओं को अपने मायके जाने के लिए निजी वाहनों में अधिक किराया देने के साथ ही भवाली चौराहे पर वाहन का इंतजार करना पड़ा। भवाली डिपो की ओर से 14 मार्गों पर बस संचालित की जाती है। भवाली डिपो के एआरएम मोहन राम ने बताया कि चालक नहीं होने से मुक्तेश्वर मार्ग पर बस का संचालन नहीं हो पा रहा है। जल्द ही इस मार्ग पर बस संचालित की जाएगी। रक्षाबंधन पर अतिरिक्त बसें चलाई गईं जिसका लाभ महिला यात्रियों को मिला।