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Swallow Bird: समय से पहले पहुंची विदेशी चिड़िया, गीली मिट्टी से बनाती है घोंसला; देखने वाले रह जाते दंग

Mon, 19 Feb 2024 02:00 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Updated Mon, 19 Feb 2024 02:00 PM IST
सार

हर साल गर्मियों में दक्षिण अफ्रीका से आने वाली मेहमान चिड़िया अबाबील इस बार निर्धारित समय से डेढ़ माह पहले ही पहाड़ में नजर आने लगी है। कई चिड़िया ने घरों और दुकानों में घोसला भी बना दिया है।

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Haldwani News: Foreign bird swallow arrived before time in nainital
भवाली में पहुंची विदेशी चिड़िया अबाबील।

विस्तार

जलवायु परिवर्तन का असर मौसम पर पड़ने के साथ प्रवासी पक्षियों के जीवन पर भी पड़ने लगा है। हर साल गर्मियों में दक्षिण अफ्रीका से आने वाली मेहमान चिड़िया अबाबील इस बार निर्धारित समय से डेढ़ माह पहले ही पहाड़ में नजर आने लगी है। कई चिड़िया ने घरों और दुकानों में घोसला भी बना दिया है।
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वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी में दिन के समय गर्मी होने से ही यह चिड़िया यहां पहुंच गई है। भवाली रेंज के रेंजर विजय मेलकानी का कहना है कि इस बार बर्फबारी नही होने से तापमान में वृद्धि हुई है। इसके चलते यह चिड़िया समय से एक माह पहले आ गई है। इस चिड़िया का स्वभाव बेहद सरल होता है और यह आसानी से पकड़ में आ जाती है। इसे देखते हुए वन कर्मचारियों को इस पर नजर रखने को कहा गया है ताकि पक्षी का अवैध शिकार न हो सके। दक्षिण अफ्रीका की इस चिड़िया की 75 प्रजातियां हैं। अबाबील को अंग्रेजी में स्वेलो कहा जाता है।
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सितंबर में अपने मूल प्रवास पर चली जाती है चिड़िया
द नॉलेज आफ साइंस नामक पुस्तक में इस चिड़िया का नाम स्वैलो (हिरूडोरस्टिका) और मार्टिन (डोलोशोन उर्निका) बताया गया है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इसे धनपुतई और गौताई के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण अफ्रीका में इसे अबाबील के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर अप्रैल के दूसरे सप्ताह में यह चिड़िया अंडे देती है। इस चिड़िया की खास बात यह है कि इसे जमीन पर बैठे नहीं देखा गया है। अधिकांश यह दुकानों और घरों में घोसला बनाते नजर आती है। छह माह प्रवास के बाद यह सितंबर में अपने मूल स्थान पर लौट जाती है।
 

ऐसे बनाती है अपना घोंसला
ये पक्षी गीली मिट्टी, कपास और मुंह की लार से घोंसला बनाते हैं। इनके हौसले की मजबूती का अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि जिस दीवार पर ये घोसला बनाते हैं, उसका प्लास्टर भले उखड़ जाता है लेकिन घोसले को नुकसान नहीं पहुंचता। यह पक्षी भारत भ्रमण पर 9 महीने के लिए निकलते हैं

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