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पहली बार भालू को लगेगा रेडियो कॉलर
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प्रतीकात्मक।
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विजेंद्र श्रीवास्तव
हल्द्वानी। वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। प्रदेश में पहली बार भालू की गतिविधियों की जानकारी के लिए रेडियो कॉलर लगाने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत गढ़वाल मंडल में जोशीमठ क्षेत्र से करने की तैयारी है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। इसी के तहत वन्यजीवों पर रेडियो कॉलर लगाने और उनकी मूवमेंट की जानकारी रखी जा रही है। विभाग ने पहले बाघ, हाथी, तेंदुओं में रेडियो कालर लगाया है। बाघ, तेंदुआ के अलावा लोगों पर भालू भी हमला करते हैं। ऐसे मामलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके, इसके लिए वन विभाग ने यह फैसला किया है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग कहते हैं कि राज्य में पहली बार भालू के मूवमेंट पर रेडियो कॉलर लगाकर जानकारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जर्मनी से रेडियो कॉलर मंगाया गया है। जोशीमठ क्षेत्र में भालू के आबादी क्षेत्र में मूवमेंट है, इस बारे में वन विभाग को बताया गया है। जहां पर शिकायत है, उस क्षेत्र जोशीमठ क्षेत्र से भालू को ट्रेंक्यूलाइज कर रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। इसके बाद अन्य दूसरी जगहों से अगर शिकायत मिलती है, वहां पर भी प्रयास किया जाएगा। भालू के लिए खास पिंजरा भी तैयार किया जा रहा है।
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कई वन्यजीवों को लग चुका रेडियो कॉलर
हल्द्वानी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग कहते हैं कि प्रदेश में कई वन्यजीवों के रेडियो कालर लगाया जा चुका है। इसमें छह तेंदुआ, तीन हाथी और एक बाघ में रेडिया कालर लगाया गया है।
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हल्द्वानी। वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। प्रदेश में पहली बार भालू की गतिविधियों की जानकारी के लिए रेडियो कॉलर लगाने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत गढ़वाल मंडल में जोशीमठ क्षेत्र से करने की तैयारी है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। इसी के तहत वन्यजीवों पर रेडियो कॉलर लगाने और उनकी मूवमेंट की जानकारी रखी जा रही है। विभाग ने पहले बाघ, हाथी, तेंदुओं में रेडियो कालर लगाया है। बाघ, तेंदुआ के अलावा लोगों पर भालू भी हमला करते हैं। ऐसे मामलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके, इसके लिए वन विभाग ने यह फैसला किया है।
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग कहते हैं कि राज्य में पहली बार भालू के मूवमेंट पर रेडियो कॉलर लगाकर जानकारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जर्मनी से रेडियो कॉलर मंगाया गया है। जोशीमठ क्षेत्र में भालू के आबादी क्षेत्र में मूवमेंट है, इस बारे में वन विभाग को बताया गया है। जहां पर शिकायत है, उस क्षेत्र जोशीमठ क्षेत्र से भालू को ट्रेंक्यूलाइज कर रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। इसके बाद अन्य दूसरी जगहों से अगर शिकायत मिलती है, वहां पर भी प्रयास किया जाएगा। भालू के लिए खास पिंजरा भी तैयार किया जा रहा है।
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कई वन्यजीवों को लग चुका रेडियो कॉलर
हल्द्वानी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग कहते हैं कि प्रदेश में कई वन्यजीवों के रेडियो कालर लगाया जा चुका है। इसमें छह तेंदुआ, तीन हाथी और एक बाघ में रेडिया कालर लगाया गया है।