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लोकगायक और शिक्षक नेता पंचम मेवाड़ी का निधन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2019 12:48 AM IST
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folk singer and leader of teacher union pancham mewaei is no more
लोक गायक पंचम मेवाड़ी की फाइल फोटो। अमर उजाला
हल्द्वानी। प्रसिद्ध लोकगायक और शिक्षक नेता पंचम सिंह मेवाड़ी का शुक्रवार को निधन हो गया। वह ब्लड कैंसर की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। शहर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से शिक्षक समाज और लोक गायकों में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार को रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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मूल रूप से ओखलकांडा ब्लॉक के ग्राम कालाआगर निवासी पंचम सिंह का परिवार वर्तमान में हल्द्वानी के त्रिलोक नगर दोनहरिया में रहता है। बचपन से ही उनका जीवन काफी संघर्षशील रहा। छोटी सी उम्र में पिता दौलत सिंह मेवाड़ी का निधन हो गया था। गांव के स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के बाद वह हल्द्वानी में आ गए। यहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने बीएससी के साथ ही संगीत से विशारद की पढ़ाई की। वर्ष 2001 में उनका चयन शिक्षा विभाग में संगीत प्रवक्ता के रूप में हुआ। वर्तमान में वह अल्मोड़ा जिले के बाड़ेछीना इंटर कॉलेज में तैनात थे।
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उन्होंने लोकगायकी में भी काफी प्रसिद्धि बटोरी थी। उनकी पहली एलबम मालपा डान लाखों लोगों की जुबान पर आज भी है। इसके बाद त्यार नाम समेत कई एलबम में गीत, संगीत दिया। पिछले कुछ माह से पंचम बीमार चल रहे थे। कुछ दिन पहले ही उन्हें ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई। दिल्ली के एम्स और गुरुग्राम के फरीदाबाद स्थित निजी अस्पताल में उपचार के बाद बृहस्पतिवार तड़के शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार शाम करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी समेत दो पुत्री और एक पुत्र को छोड़ गए हैं। वह कुमाऊं भर में दर्जनों स्थानों पर रामलीला मंचन में निर्देशन के साथ ही हारमोनियम वादन कर चुके थे। काला आगर में उन्होंने 12 साल तक लगातार रामलीला का निर्देशन किया था।
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कई कुमाऊंनी गीत लिखे
लोक गायक प्रहलाद मेहरा ने बताया कि पंचम मेवाड़ी के साथ दिल्ली, देहरादून समेत कई जगहों पर मंच साझा करने का मौका मिला। वह अच्छे गायक थे। उन्होंने कई कुमाऊंनी गीतों की रचना भी की। उनके कई एलबम भी आए थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए संस्था बनाने में भी आगे आए। उनका जाना अपूरणीय क्षति है।
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