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सावन का पहला सोमवार : शिवालयों में गूंजा बम-बम भोले
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हल्द्वानी। भगवान शिव के सबसे प्रिय सावन महीने क पहले सोमवार को शहर और आसपास के शिावलयों में लोगों ने जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिरों में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा अर्चना की। कई लोगों ने घरों में भी शिवार्चन कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। शिवालयों में हर-हर भोले, बम-बम भोले की गूंज रही। कोरोना के चलते मंदिरों में भीड़ तो कम रही लेकिन सामाजिक का भी पालन नहीं किया गया।
प्राचीन शिव मंदिर, पिपलेश्वर महादेव, कालू सिद्ध, काल भैरव, शीशमहल शिव मंदिर, कुसुमखेड़ा शिव मंदिर, रानीबाग शिवालय समेत तमाम शवि मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। ज्योतिषी डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालयों के बंद होने से महाविद्यालयों में किसी तरह के आयोजन नहीं किए गए लेकिन शिवालयों में जलाभिषेक आदि किया गया।
आज से क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाएंगे भगवान विष्णु
हल्द्वानी। मंगलवार को हरिशयनी, देवशयनी यानी तुलसी एकादशी है। हरिशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चातुर्मास में चार महीने के लिए क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाएंगे। चार महीने के लिए मांगलिक कार्य भी बंद हो जाएंगे। 15 नवंबर को हरिप्रबोधनी एकादशी पर भगवान जागृत होंगे और उसी दिन से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। आज घर-घर तुलसी पौध रोपण कर लोग तुलसी की पूजा अर्चना शुरू कर देंगे।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी और अंक ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि एकादशी तिथि का प्रारंभ 19 जुलाई की रात 9:59 बजे से 20 जुलाई शाम 7:17 बजे तक रहेगी। 20 जुलाई को उदयातिथि में ही व्रत का पालन श्रेयस्कर होगा।
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प्राचीन शिव मंदिर, पिपलेश्वर महादेव, कालू सिद्ध, काल भैरव, शीशमहल शिव मंदिर, कुसुमखेड़ा शिव मंदिर, रानीबाग शिवालय समेत तमाम शवि मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। ज्योतिषी डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालयों के बंद होने से महाविद्यालयों में किसी तरह के आयोजन नहीं किए गए लेकिन शिवालयों में जलाभिषेक आदि किया गया।
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आज से क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाएंगे भगवान विष्णु
हल्द्वानी। मंगलवार को हरिशयनी, देवशयनी यानी तुलसी एकादशी है। हरिशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चातुर्मास में चार महीने के लिए क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाएंगे। चार महीने के लिए मांगलिक कार्य भी बंद हो जाएंगे। 15 नवंबर को हरिप्रबोधनी एकादशी पर भगवान जागृत होंगे और उसी दिन से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। आज घर-घर तुलसी पौध रोपण कर लोग तुलसी की पूजा अर्चना शुरू कर देंगे।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी और अंक ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि एकादशी तिथि का प्रारंभ 19 जुलाई की रात 9:59 बजे से 20 जुलाई शाम 7:17 बजे तक रहेगी। 20 जुलाई को उदयातिथि में ही व्रत का पालन श्रेयस्कर होगा।