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बाढ़ पीड़ितों को हाईकोर्ट से राहत: मुजफ्फरनगर के परिवारों को हरिद्वार डीएम को नया प्रत्यावेदन देने की छूट

Thu, 24 Sep 2026 09:08 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Thu, 24 Sep 2026 09:08 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के बाढ़ प्रभावित परिवारों को भूमि आवंटन के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की।

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Families from Muzaffarnagar are allowed to submit a fresh representation to the Haridwar DM
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के बाढ प्रभावित परिवारों को भूमि आवंटन किए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओ को हरिद्वार जिलाधिकारी को नया प्रत्यावेदन देने की छूट प्रदान की है। कोर्ट ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर नया प्रतिवेदन देते हैं, तो जिलाधिकारी को कानून के अनुसार नौ माह के भीतर उस प्रत्यावेदन पर निर्णय लेना होगा।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

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मामले के अनुसार राम बहादुर और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वर्ष 1951-52 में आई बाढ़ के कारण मुजफ्फरनगर जिले के विभिन्न गांवों में स्थित उनकी कृषि भूमि बह गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 अप्रैल 1952 को अधिसूचना जारी कर बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरिद्वार जिले के पाथरी वन क्षेत्र में भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव रखा था, और इसके लिए पाथरी वन क्षेत्र को डी-नोटिफाई भी किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उन्हें अब तक इस डी-नोटिफाइड भूमि का आवंटन नहीं मिला है, जबकि अन्य समान स्थिति वाले लोगों को वन भूमि आवंटित कर दी गई।
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याचिका के माध्यम से हरिद्वार (तत्कालीन सहारनपुर) जिले के पाथरी रिजर्व फॉरेस्ट, कम्पार्टमेंट नंबर 1 व 3 में याचिकाकर्ताओं-उनके पूर्वजों के पक्ष में भूमि आवंटन कराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ताओं को जिलाधिकारी, हरिद्वार के समक्ष नया प्रतिवेदन देने की छूट प्रदान कर दी। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर प्रतिवेदन देते हैं, तो जिलाधिकारी को कानून के अनुसार नौ माह के भीतर निर्णय लेना होगा।

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