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हर साल घट रहे हैं सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी
हरीश पांडे
Updated Tue, 30 May 2017 11:59 PM IST
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निजी स्कूलों
- फोटो : concept photo
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सरकार शिक्षा में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। हर वर्ष शिक्षा के खर्च में बढ़ोत्तरी भी की जा रही है। उसके बाद भी सरकारी स्कूलों में लगातार विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। राहत है तो इतनी की बोर्ड का परीक्षा परिणाम बता रहा है कि छात्र संख्या कम होने के बाद भी परीक्षा परिणाम में गुणात्मक सुधार है।
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उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर की ओर से जारी हाईस्कूल के पांच सालों के आंकड़ों में गौर करें तो वर्ष 2013 में 176823 हाइस्कूल की परीक्षा में सम्मलित हुए। इसके बाद हर वर्ष सरकारी स्कूल में विद्यार्थी घटते रहे। 2017 में 150573 पहुंच गए।
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लेकिन इसमें एक बात ये सही रही कि सम्मान सहित उत्तीर्ण होने वाले और प्रथम श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या प्रत्येक वर्ष बढ़ी है। वर्ष 2013 में हाईस्कूल में सम्मान सहित पास होने वालों की संख्या 3787 थी। 2017 तक बढ़ते हुए यह 5411 तक पहुंच गयी। वहीं प्रथम श्रेणी पास होने वालों की संख्या 2013 में 24553 थी जो 2017 में बढ़कर 26109 पहुंच गयी।
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इंटरमीडिएट में 2013 में 132267 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। 2017 में घटकर 131190 रह गयी। राहत यह है कि सम्मान सहित उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2013 में 981 विद्यार्थी सम्मान सहित पास हुए।
वहीं, 2017 में आते-आते इनकी संख्या बढ़कर 2389 तक पहुंच गयी। वहीं प्रथम श्रेणी में 2013 में 12735 विद्यार्थी पास हुए। वहीं यह संख्या भी 2017 में बढ़ते हुए 19667 तक पहुंच गयी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में 2013 से 2017 तक द्वितीय श्रेणी और तृतीय श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार गिरती जा रही है।