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खनन पट्टों के कारण डेढ़ लाख लोगों के रोजगार में संकट पैदा
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हल्द्वानी। चुनाव से ठीक पहले समतलीकरण के नाम पर दिए गए खनन पट्टों के कारण 1.5 लाख लोगों के रोजगार में संकट खड़ा हो गया है। गौला नदी में बचे चार लाख घनमीटर उपखनिज को खरीदने के लिए खरीददार नहीं मिल रहे हैं। रायल्टी अधिक होने के कारण उपखनिज महंगा होने से स्टोन क्रशरों का उपखनिज बाहरी प्रदेशों में नहीं बिक पा रहा है। स्टोन क्रशर स्वामियों से लेकर गौला नदी से जुड़े सभी व्यवसायी इसके लिए समतलीकरण के नाम पर दिए गए खनन पट्टों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
गौला नदी के 11 गेटों में 7500 डंपर पंजीकृत हैं। इन डंपरों की मदद से गौला से आरबीएम निकाला जाता है जिसे बरेली और रामपुर रोड स्थित 22 स्टोन क्रशर खरीदते हैं। इस बार गौला नदी में आए पानी के कारण उपखनिज भी अच्छा आया था। इससे वाहन स्वामियों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी। वहीं स्टोन क्रशर स्वामी भी इससे खुश थे कि इस बार नदी के उपखनिज में मिट्टी नहीं है।
गौला नदी में रायल्टी सहित अन्य खर्चे 33 रुपये प्रति क्विंटल के पड़ रहे हैं। उधर चुनाव से ठीक पहले समतलीकरण के नाम पर कई खनिज पट्टे जारी हुए। इन खनन पट्टों की रायल्टी पांच से आठ रुपये प्रति क्विंटल की थी। ऐसे में बाजपुर, रामनगर सहित कई जगह उपखनिज के दाम गिर गए। ऐसे में बरेली और रामपुर रोड के स्टोन क्रशरों की बिक्री घट गई।
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उधर तीन मई से बरेली रोड के अधिकांश स्टोन क्रशरों ने उपखनिज लेना बंद कर दिया। डंपर मालिकों का कहना है कि बुधवार को रामपुर रोड के सभी पांचों स्टोन क्रशरों ने भी माल खरीदना बंद कर दिया है, जबकि गौला नदी में अभी चार लाख घनमीटर उपखनिज की निकासी होना शेष है।
स्टोन क्रशरों के उपखनिज खरीदना बंद करने के चलते डंपर स्वामियों के सामने अब रोजगार का संकट पैदा हो गया है। वाहन स्वामी अपने वाहनों को सरेंडर करवा रहे हैं। उधर बाहरी प्रदेशों से आए श्रमिक भी लौटने लगे हैं।
चार लाख घन मीटर निकालना है आरबीएम
गौला में इस बार करीब 38 लाख घन मीटर खनन की अनुमति है। जिसमें से 34 लाख घन मीटर निकल चुका है और करीब 4 लाख घन मीटर आरबीएम निकाला शेष है। अगर यह आरबीएम नहीं निकलता तो इससे जहां डंपर कारोबारियों को नुकसान होगा वहीं राज्य को भी करोड़ों के राजस्व नुकसान होगा।
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कोट -
समतलीकरण के नाम पर जारी किए गए पट्टों की रायल्टी पांच से आठ रुपये पड़ रही है। वहीं गौला नदी में उपखनिज की रायल्टी 33 रुपये के आसपास है। पट्टों की रायल्टी कम होने और गौला नदी की रायल्टी अधिक होने के कारण स्टोन क्रशर मालिकों का उपखनिज नहीं बिक पा रहा है। इस कारण उन्होंने गौला नदी का आरबीएम खरीदना बंद कर दिया है। 4-5 स्टोन क्रशर अपनी शर्तों पर आरबीएम खरीद रहे हैं । इस कारण गौला में खनन करने वाले 70 प्रतिशत डंपर खड़े हो गए हैं जिससे खनन कारोबार से जुड़े सभी लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
- मनोज मठपाल, अध्यक्ष, डंपर एसोसिएशन हल्द्वानी, पार्षद, गौजाजाली
स्टोन क्रशर उपखनिज नहीं खरीद रहे हैं। इस कारण गौला नदी से तय मात्रा में उपखनिज निकलना मुश्किल हो गया है।
-वाईके श्रीवास्तव, डीएलएम, वन विकास निगम
गौला नदी से जुड़े स्टोन क्रशरों का उपखनिज रायल्टी के कारण महंगा है। इस कारण यूपी सहित अन्य जगह से डिमांड नहीं मिल पा रही है। बिक्री नहीं होने के कारण वह उपखनिज खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
-राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष कुमाऊं स्टोन क्रशर एसोसिएशन
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गौला नदी के 11 गेटों में 7500 डंपर पंजीकृत हैं। इन डंपरों की मदद से गौला से आरबीएम निकाला जाता है जिसे बरेली और रामपुर रोड स्थित 22 स्टोन क्रशर खरीदते हैं। इस बार गौला नदी में आए पानी के कारण उपखनिज भी अच्छा आया था। इससे वाहन स्वामियों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी। वहीं स्टोन क्रशर स्वामी भी इससे खुश थे कि इस बार नदी के उपखनिज में मिट्टी नहीं है।
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गौला नदी में रायल्टी सहित अन्य खर्चे 33 रुपये प्रति क्विंटल के पड़ रहे हैं। उधर चुनाव से ठीक पहले समतलीकरण के नाम पर कई खनिज पट्टे जारी हुए। इन खनन पट्टों की रायल्टी पांच से आठ रुपये प्रति क्विंटल की थी। ऐसे में बाजपुर, रामनगर सहित कई जगह उपखनिज के दाम गिर गए। ऐसे में बरेली और रामपुर रोड के स्टोन क्रशरों की बिक्री घट गई।
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उधर तीन मई से बरेली रोड के अधिकांश स्टोन क्रशरों ने उपखनिज लेना बंद कर दिया। डंपर मालिकों का कहना है कि बुधवार को रामपुर रोड के सभी पांचों स्टोन क्रशरों ने भी माल खरीदना बंद कर दिया है, जबकि गौला नदी में अभी चार लाख घनमीटर उपखनिज की निकासी होना शेष है।
स्टोन क्रशरों के उपखनिज खरीदना बंद करने के चलते डंपर स्वामियों के सामने अब रोजगार का संकट पैदा हो गया है। वाहन स्वामी अपने वाहनों को सरेंडर करवा रहे हैं। उधर बाहरी प्रदेशों से आए श्रमिक भी लौटने लगे हैं।
चार लाख घन मीटर निकालना है आरबीएम
गौला में इस बार करीब 38 लाख घन मीटर खनन की अनुमति है। जिसमें से 34 लाख घन मीटर निकल चुका है और करीब 4 लाख घन मीटर आरबीएम निकाला शेष है। अगर यह आरबीएम नहीं निकलता तो इससे जहां डंपर कारोबारियों को नुकसान होगा वहीं राज्य को भी करोड़ों के राजस्व नुकसान होगा।
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समतलीकरण के नाम पर जारी किए गए पट्टों की रायल्टी पांच से आठ रुपये पड़ रही है। वहीं गौला नदी में उपखनिज की रायल्टी 33 रुपये के आसपास है। पट्टों की रायल्टी कम होने और गौला नदी की रायल्टी अधिक होने के कारण स्टोन क्रशर मालिकों का उपखनिज नहीं बिक पा रहा है। इस कारण उन्होंने गौला नदी का आरबीएम खरीदना बंद कर दिया है। 4-5 स्टोन क्रशर अपनी शर्तों पर आरबीएम खरीद रहे हैं । इस कारण गौला में खनन करने वाले 70 प्रतिशत डंपर खड़े हो गए हैं जिससे खनन कारोबार से जुड़े सभी लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
- मनोज मठपाल, अध्यक्ष, डंपर एसोसिएशन हल्द्वानी, पार्षद, गौजाजाली
स्टोन क्रशर उपखनिज नहीं खरीद रहे हैं। इस कारण गौला नदी से तय मात्रा में उपखनिज निकलना मुश्किल हो गया है।
-वाईके श्रीवास्तव, डीएलएम, वन विकास निगम
गौला नदी से जुड़े स्टोन क्रशरों का उपखनिज रायल्टी के कारण महंगा है। इस कारण यूपी सहित अन्य जगह से डिमांड नहीं मिल पा रही है। बिक्री नहीं होने के कारण वह उपखनिज खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
-राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष कुमाऊं स्टोन क्रशर एसोसिएशन