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दराती ले महिलाओं ने वनकर्मियों को दौड़ाया
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर
Updated Sun, 16 Oct 2016 01:35 AM IST
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दराती ले महिलाओं ने वनकर्मियों को दौड़ाया
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र में 40 दिन से आदमखोर बाघिन के आतंक के बावजूद उसे न तो मारने और न ही पकड़े जाने से ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। इससे गुस्सायी ग्रामीण महिलाओं ने शनिवार को दराती लेकर वन विभाग की टीम को दौड़ा दिया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया।
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शनिवार सुबह जैसे ही वनकर्मी गश्त के बाद गौजानी स्थित दुकान में चाय, नाश्ता करने पहुंचे वैसे ही गुस्सायी महिलाएं हाथों में दराती लेकर वनकर्मियों के पास पहुंच गईं। कुछ महिलाओं ने एक-दो वनकर्मियों के गले पर दराती रख अपने गुस्से का इजहार किया।
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इससे सहमे कई वनकर्मियों ने वहां से दौड़ लगा दी। तभी तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर रेंज के रेंजर मौके पर पहुंचे तो लोग उनका घेराव कर उनकी गाड़ी के आगे लेट गए और खूब खरीखोटी सुनाई।
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गुस्साए विमला रौतेला, सरुली देवी, दुर्गेश देवी, नेहा तड़ियाल, सुुुुभाष सिंह ने बताया कि शुक्रवार रात गौजानी गांव के पास एक गन्ने के खेत में आदमखोर बाघिन के दिखाई देने पर ग्रामीणों ने बाघिन की तलाश में लगे वनकर्मियों की इसकी सूचना दी। लेकिन वनकर्मियों ने ग्रामीणों की इस सूचना को कोई तवज्जो नहीं दी।
शनिवार की सुबह भी ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बुलाया, लेकिन वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। जिससे ग्रामीणों का पारा गरम हो गया। ग्रामीणों के रुख को देखते हुए वनकर्मियों ने ऑपरेशन बीच में ही छोड़कर हाथीडंगर वन चौकी पर पड़ाव डाल दिया।
बाद में विभागीय अधिकारियों के हस्तक्षेप पर वनकर्मियों ने वापस लौटकर बाघिन की तलाश में चलाया जा रहा ऑपरेशन दोबारा शुरू किया। इस मामले में ग्रामीण जहां वनकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आपरेशन में लगे वनकर्मियों ने ग्रामीणों पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है।
आक्रोशित महिलाओं ने कहा कि अब यदि बाघिन का हमला किसी पर हुआ तो विभाग के ऊपर ऐसा गुस्सा फूटेेगा, जो संभाले नहीं संभलेगा।
40 दिन बाद भी जंगलात की पकड़ से दूर बाघिन
एक माह से अधिक समय से आतंक का पर्याय बनी नरभक्षी बाघिन विभाग का जहां सिरदर्द बनी है वहीं ग्रामीणों में दहशत के साथ ही आक्रोश भी है। रोज की तरह विभाग जहां हर सुबह कैमरा ट्रैप चेक कर बाघिन की लोकेशन पर गश्त कर रहा है तो ग्रामीणों की सूचना पर भी संभावित ठिकानों पर गन्ने के खेतों में जाल से घेराबंदी कर हांका लगा ड्रोन से भी चेक किया जा रहा है।
शनिवार को गौजानी, मोतीपुर, करनपुर नाले के पास तीनों गांव में तेंदुओं के पंजों के निशान मिले। जिसके चलते विभाग ने बाघिन के साथ साथ तेंदुए को पकड़ने के लिए भी पिंजरे लगा दिए हैं। एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि हल्द्वानी से पहुंचे एसडीओ जीएस कार्की और पीसी आर्या कैमरा ट्रैप चेक करने और लगाने का काम संभाले हुए हैं। वहीं दूसरी टीम बाघिन के संभावित ठिकानों पर जाल से खेतों को घेरकर हांका लगा बाघिन की तलाश कर रही है।
इसके साथ ही कई टीमें दिन रात गश्त करने के साथ मचान पर भी शिकारी बैठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद चालाक नरभक्षी बाघिन वन विभाग से अभी दो कदम आगे ही है। बाघिन के न पकड़े जाने से जहां विभाग चिंतित है, वहीं ग्रामीणों में भय, आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का जनजागरण अभियान जारी
आदमखोर बाघिन को तत्काल मारने, आबादी में घुस रहे जंगली जानवरों को मारने का अधिकार जनता को देने आदि मांगों को लेकर समिति का जनजागरण कार्यक्रम लगातार जारी है। ग्राम धनपुर में हुई ग्रामीणों की बैठक को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि सरकार द्वारा अनुसूची 1 के जानवर को मारने पर 50 लाख रुपये जुर्माना निर्धारित किया गया है लेकिन जंगली जानवरों द्वारा इंसान को मारे जाने पर उसे तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है।
सरकार की नजर में इंसान के मुकाबले जानवर की कीमत ज्यादा है। उन्होंने जंगली जानवर द्वारा इंसान को मारे जाने पर 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। इसी क्रम में 16 अक्तूबर को सुबह 9 बजे उम्मेदपुर, दिन में 2 बजे धनखोला में बैठक होगी।
बैठक में मो. ताहिर, यासीन, पीसी जोशी, महेश जोशी, मुनीष कुमार, हाजी जमीर अहमद, अब्दुल गफ्फार, ताहिर हुसैन, अमीर अहमद, जाकिर हुसैन, हरजिंदर सिंह, अमृत पाल, इंदर सिंह आदि थे।
फसल तैयार, नहीं मिल पा रहे काटने को मजदूर
क्षेत्र में बाघिन का आतंक ऐसा कि धान की तैयार फसल काटने को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। जो मजदूर मिल भी रहे हैं तो वे अधिक मजदूरी मांग रहे हैं। जिससे ग्रामीण जहां दहशत में हैं वहीं मजदूर न मिलने, मजदूरी ज्यादा होने पर दोहरी मार झेल रहे हैं। तल्ला कानिया निवासी हरीश पंत ने बताया कि पहले 25 सौ रुपये एकड़ के हिसाब से मजदूरी दी जाती थी अब ये 3500 सौ रुपये एकड़ हो चली है।
जिसके साथ ही मजदूरों ने भी अपनी डिमांड रखी है कि शाम चार बजे तक ही काम किया जाएगा। रात को कोई काम नहीं करेंगे। इससे किसान बड़ी परेशानी में हैं। बाघिन के दिखने की सूचना वाले गांवाें में मजदूर फसल काटने को ही मना कर दे रहे हैं।
जो किसान फसल काट भी रहे हैं, वे अपने नजदीकी लोगों को बुला पहरा देकर फसल को कटवा रहे हैं। यदि समय रहते बाघिन को न मारा, पकड़ा गया तो जहां तो ग्रामीणों का गुस्सा होना लाजिमी है।
सोशल मीडिया ने फैलाई अफवाह
पहले बाघिन के पकड़े जाने की सूचना सोशल मीडिया में इस तरह फैली कि उससे अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। दरअसल पहले कोटद्वार में एक बाघिन फंदे में फंसने का वीडियो वायरल हुआ। बाघिन को फंदे में फंसा देखने वाले लोग जाड़ों के दिनों में पहने जाने वाले कपड़े कोट, जैकेट, स्वेटर आदि पहने थे।
पहले तो रामनगर इलाके में बाघिन के पकड़े जाने को लेकर खुशी मनाई जाने लगी लेकिन कुछ देर बाद लोगों को हकीकत का पता चला कि यह कोई पुरानी वीडियो वायरल की गई है।