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डाक्टरों की आपसी खींचतान से मरीजों की फजीहत
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:01 AM IST
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डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में डाक्टरों की आपसी खींचतान से न्यूरो के मरीजों की फजीहत हो रही है। न्यूरो से संबंधित मरीजों के 26 जुलाई से आपरेशन ही बंद हैं। आरोप है कि न्यूरो विभाग एनेस्थिसिया विभाग से आपरेशन के लिए तिथि निश्चित करने को आग्रह कर रहा है लेकिन एनेस्थिसिया विभाग की आपत्तियों की वजह से एक भी आपरेशन को हरी झंडी नहीं मिल सकी है। एनेस्थिसिया विभाग न्यूरो सर्जरी के मामलों में कार्डियोलाजिस्ट की ओपीनियन होने का तर्क देकर ‘ओके’ करने को तैयार नहीं है। इधर, एसटीएच की इस खींचतान से न्यूरो के गंभीर रोगियों को आपरेशन के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में वर्तमान में दो न्यूरो सर्जन डा. मिथिलेश पांडेय और डा. दीपक पवार तैनात हैं। केवल पांच रुपये पर्चे पर न्यूरो सर्जन को दिखाने की सुविधा होने के कारण ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 तक मरीज पहुंच रहे हैं। बताते हैं कि ओपीडी में पहले न्यूरो के मरीज सप्ताह में चार दिन देखे जाते थे। लेकिन बाद में सर्जरी विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने न्यूरो की ओपीडी को सप्ताह में दो दिन करा दिया।
इसी बीच मेडिकल कालेज के प्राचार्य को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने आदेश निकाल कर पहली अगस्त से न्यूरो की ओपीडी सप्ताह में चार दिन करवा दी। इससे सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक खफा हो गए। बस इसी बात पर सर्जरी और न्यूरो के चिकित्सकों में खींचतान शुरू हो गई। आरोप है कि न्यूरो विभाग आपरेशन के लिए 26 जुलाई से लगातार लिख रहा है मगर एनेस्थिसिया विभाग से रोगियों को ओके नहीं मिल पा रहा है।
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बताते हैं कि जब तक एनेस्थिसिया विभाग की ओके रिपोर्ट नहीं होगी न्यूरो के मरीज का आपरेशन नहीं हो सकता। इसी लिए 26 जुलाई से एक भी मरीज का आपरेशन नहीं हो सका है। न्यूरो विभाग के आपरेशन केसों में एनेस्थिसिया विभाग खांसी की दिक्कत या कुछ भी होने पर मरीज के लिए कार्डियोलाजिस्ट की ओपीनियन होने की बात लिख तिथि टाल दे रहा है। जबकि एसटीएच में कार्डियोलाजिस्ट कोई है ही नहीं, अभी तक मेडिसन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डा. अरुण जोशी की ओपीनियन पर ही आपरेशन होते रहे हैं।
न्यूरो विभाग की शिकायत मेरे संज्ञान में आई है। न्यूरो के आपरेशन क्यों नहीं हो पा रहे हैं इस बारे में न्यूरो और एनेस्थिसिया के चिकित्सकों को साथ बैठाकर मीटिंग की जाएगी तथा इसका समाधान निकाला जाएगा। ताकि आपरेशन जल्द शुरू हो सकें।
- डा. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज
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जानकारी के मुताबिक डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में वर्तमान में दो न्यूरो सर्जन डा. मिथिलेश पांडेय और डा. दीपक पवार तैनात हैं। केवल पांच रुपये पर्चे पर न्यूरो सर्जन को दिखाने की सुविधा होने के कारण ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 तक मरीज पहुंच रहे हैं। बताते हैं कि ओपीडी में पहले न्यूरो के मरीज सप्ताह में चार दिन देखे जाते थे। लेकिन बाद में सर्जरी विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने न्यूरो की ओपीडी को सप्ताह में दो दिन करा दिया।
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इसी बीच मेडिकल कालेज के प्राचार्य को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने आदेश निकाल कर पहली अगस्त से न्यूरो की ओपीडी सप्ताह में चार दिन करवा दी। इससे सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक खफा हो गए। बस इसी बात पर सर्जरी और न्यूरो के चिकित्सकों में खींचतान शुरू हो गई। आरोप है कि न्यूरो विभाग आपरेशन के लिए 26 जुलाई से लगातार लिख रहा है मगर एनेस्थिसिया विभाग से रोगियों को ओके नहीं मिल पा रहा है।
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बताते हैं कि जब तक एनेस्थिसिया विभाग की ओके रिपोर्ट नहीं होगी न्यूरो के मरीज का आपरेशन नहीं हो सकता। इसी लिए 26 जुलाई से एक भी मरीज का आपरेशन नहीं हो सका है। न्यूरो विभाग के आपरेशन केसों में एनेस्थिसिया विभाग खांसी की दिक्कत या कुछ भी होने पर मरीज के लिए कार्डियोलाजिस्ट की ओपीनियन होने की बात लिख तिथि टाल दे रहा है। जबकि एसटीएच में कार्डियोलाजिस्ट कोई है ही नहीं, अभी तक मेडिसन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डा. अरुण जोशी की ओपीनियन पर ही आपरेशन होते रहे हैं।
न्यूरो विभाग की शिकायत मेरे संज्ञान में आई है। न्यूरो के आपरेशन क्यों नहीं हो पा रहे हैं इस बारे में न्यूरो और एनेस्थिसिया के चिकित्सकों को साथ बैठाकर मीटिंग की जाएगी तथा इसका समाधान निकाला जाएगा। ताकि आपरेशन जल्द शुरू हो सकें।
- डा. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज