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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Disturbed situation, breaking the record on 'forest fire'

बिगड़े हालात, रिकार्ड तोड़नेे की तरफ ‘दावाग्नि’ 

Wed, 13 Apr 2016 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Wed, 13 Apr 2016 10:23 PM IST
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 कम बरसात और बढ़ते तापमान से जंगल माचिस की तीली की तरह जल रहे हैं। सबसे ज्यादा गढ़वाल मंडल के जंगल जल रहे हैं। यहां पर आग से दो लोगों की मौत तक हो चुकी है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो वर्तमान में सौ से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।
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मुख्य वन संरक्षक विधि प्रकोष्ठ के पास प्रदेश में दावाग्नि नियंत्रण की जिम्मेदारी है। आंकड़े बताते हैं कि दावानल बेकाबू हो रहा है। बरसात न के बराबर हुई, जंगल में नमी नहीं है, ऐसे में सूखे जंगल तेजी से जल रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता का कहना है कि इस बार तो फरवरी के महीने से आग लगने की घटना शुरू हो गई थी। अब तक 12 अप्रैल तक 107 घटनाएं रिपोर्ट हो चुकी हैं। गढ़वाल में 59, कुमाऊं में 24 घटनाएं और वन्यजीव क्षेत्र में 24 दवाग्नि के मामले सामने आए हैं।
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इसमें 119 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। जबकि 2015 में अप्रैल के आखिरी सप्ताह से जंगल में आग लगने की घटनाएं रिपोर्ट होना शुरू हुई थी। पिछले साल जून के आखिर तक में 412 घटनाएं हुईं थी, इसमें 701 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा था। पर इस बार जो हालात है, उसमें फिलहाल स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। जंगल में आग को काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उत्तरकाशी में दो लोगों की मौत हुई थी, उनको चार-चार लाख का मुआवजा भी एक सप्ताह के अंदर दिया गया है।
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अमेरिका के सेटेलाइट से नजर
हल्द्वानी। वन विभाग की दावाग्नि नियंत्रण कार्यक्रम में अमेरिका का सेटेलाइट काफी मददगार साबित हुआ है। सीसीएफ बीपी गुप्ता बताते हैं कि अमेरिका के मोर्डिस सेटेलाइट से काफी सहायता मिल रही है। यह सेटेलाइट दिन में दो बार इलाके के ऊपर से गुजरता है, उसके बाद वह आग के मामले को डिटेक्ट करता है, जिसके बाद फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के माध्यम से यह जानकारी हमारे पास आती है, जिसके बाद टीमों को आग पर काबू पाने के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर से जो सूचना मिलती है, उसके आधार पर भी कार्रवाई की जाती है।
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