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Nainital News: तीन सप्ताह में कोर्ट में प्रतिशपथपत्र पेश करें याचिकाकर्ता
Sat, 01 Apr 2023 01:47 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 01 Apr 2023 01:47 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों के मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं से तीन सप्ताह के भीतर प्रतिशपथपत्र पेश करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी। कोर्ट में शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय की तरफ से शपथपत्र पेश किया गया। सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।
बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, कुलदीप सिंह व 102 अन्य की ओर से बर्खास्तगी के आदेश को एकलपीठ में चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं 27, 28 व 29 सितंबर 2022 को समाप्त कर दी गईं। बर्खास्तगी आदेश में उन्हें किस आधार पर किस कारण हटाया गया, इसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया और ना हीं उन्हें सुना गया जबकि वह सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य करते रहे। एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित में नहीं है। यह आदेश विधि विरुद्ध है। विधानसभा सचिवालय में 396 पदों पर 2001 से 2015 के बीच बैकडोर से भी नियुक्तियां हुईं हैं, जिनको नियमित किया जा चुका है। 2014 तक तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया गया और अब उन्हें हटा दिया गया। पूर्व में उनकी नियुक्ति को 2018 में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गई थी, जिसमें कोर्ट ने उनके हित में आदेश दिया था। कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को वैध माना था। नियमानुसार छह माह की नियमित सेवा के बाद उन्हें नियमित किया जाना था।
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बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, कुलदीप सिंह व 102 अन्य की ओर से बर्खास्तगी के आदेश को एकलपीठ में चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं 27, 28 व 29 सितंबर 2022 को समाप्त कर दी गईं। बर्खास्तगी आदेश में उन्हें किस आधार पर किस कारण हटाया गया, इसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया और ना हीं उन्हें सुना गया जबकि वह सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य करते रहे। एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित में नहीं है। यह आदेश विधि विरुद्ध है। विधानसभा सचिवालय में 396 पदों पर 2001 से 2015 के बीच बैकडोर से भी नियुक्तियां हुईं हैं, जिनको नियमित किया जा चुका है। 2014 तक तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया गया और अब उन्हें हटा दिया गया। पूर्व में उनकी नियुक्ति को 2018 में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गई थी, जिसमें कोर्ट ने उनके हित में आदेश दिया था। कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को वैध माना था। नियमानुसार छह माह की नियमित सेवा के बाद उन्हें नियमित किया जाना था।
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