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भाई के परिवार को सचेत कर खुद मलबे में दफन हो गया चंद्र सिंह
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धारचूला के कुलागाड़ में बने क्रशर प्लांट को भारी क्षति पहुंची है। तारकोल के सैकड़ों ड्रम नदी में
- फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। जामुनी तोक में रहने वाले चंद्र सिंह को तबाही की आहट हुई तो सबसे पहले उन्होंने अपने भाई के घर जाकर उन्हें सचेत किया। भागकर पत्नी और तीन भतीजियों को जगाने आए तब तक मकान के साथ खुद भी मलबे में बह गए। तीन बेटियों, भाई और भाभी के मलबे में दफन होने से छोटे भाई का परिवार दहशत और सदमे में है।
रात 12 बजे के करीब भारत और नेपाल में जब मूसलाधार बारिश हुई तो काली नदी के शोर और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन से धरती कांपने लगी। जामुनी तोक में रहने वाले दो भाई चंद्र सिंह और जोगा सिंह के मकान अगल-बगल स्थित थे। जोगा सिंह की तीन बेटियां अपने चाचा चंद्र सिंह के घर में सोई थीं। तेज बारिश के कारण जब पहाड़ी की ओर से मलबा आने लगा तो चंद्र सिंह की नींद खुल गई। इसके बाद उसने बारिश में ही बाहर जाकर अपने भाई जोगा सिंह को जगाया और सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा। जोगा सिंह ने तत्काल पत्नी और दो बेटों को जगाया और सुरक्षित स्थान की ओर भाग निकले।
इधर, चंद्र सिंह जैसे ही पत्नी और भतीजियों को जगाने के लिए भीतर गया तब तक पहाड़ी से आए मलबे ने मकान को जमींदोज कर दिया। घर में मौजूद सभी पांच सदस्य देखते ही देखते मलबे में दफन हो गए। सुबह होने पर जोगा सिंह को अपने और भाई के घर पास मलबा और पत्थर ही नजर आए। बताया जा रहा है कि हादसे में पत्नी के साथ लापता चंद्र सिंह का एक बेटा पिथौरागढ़ में पढ़ता है। इसके चलते वह बच गया। प्रकृति के इस कहर के बाद पूरा गांव सहमा हुआ है। दशकों से इस आपदा की त्रासदी झेल रहे ग्रामीणों की आंखों में खौफ साफ दिखाई देता है।
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सड़क ध्वस्त होने से जुम्मा गांव पहुंचना मुश्किल
धारचूला। रविवार रात अतिवृष्टि के कारण धारचूला-तवाघाट सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। सड़क सुधार की फिलहाल उम्मीद नहीं है। ऐसे में लोगों को करीब 15 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ेगा। इन हालातों में क्षेत्र में राशन सहित अन्य जरूरी सामान की किल्लत होने की भी आशंका है।
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रात 12 बजे के करीब भारत और नेपाल में जब मूसलाधार बारिश हुई तो काली नदी के शोर और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन से धरती कांपने लगी। जामुनी तोक में रहने वाले दो भाई चंद्र सिंह और जोगा सिंह के मकान अगल-बगल स्थित थे। जोगा सिंह की तीन बेटियां अपने चाचा चंद्र सिंह के घर में सोई थीं। तेज बारिश के कारण जब पहाड़ी की ओर से मलबा आने लगा तो चंद्र सिंह की नींद खुल गई। इसके बाद उसने बारिश में ही बाहर जाकर अपने भाई जोगा सिंह को जगाया और सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा। जोगा सिंह ने तत्काल पत्नी और दो बेटों को जगाया और सुरक्षित स्थान की ओर भाग निकले।
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इधर, चंद्र सिंह जैसे ही पत्नी और भतीजियों को जगाने के लिए भीतर गया तब तक पहाड़ी से आए मलबे ने मकान को जमींदोज कर दिया। घर में मौजूद सभी पांच सदस्य देखते ही देखते मलबे में दफन हो गए। सुबह होने पर जोगा सिंह को अपने और भाई के घर पास मलबा और पत्थर ही नजर आए। बताया जा रहा है कि हादसे में पत्नी के साथ लापता चंद्र सिंह का एक बेटा पिथौरागढ़ में पढ़ता है। इसके चलते वह बच गया। प्रकृति के इस कहर के बाद पूरा गांव सहमा हुआ है। दशकों से इस आपदा की त्रासदी झेल रहे ग्रामीणों की आंखों में खौफ साफ दिखाई देता है।
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सड़क ध्वस्त होने से जुम्मा गांव पहुंचना मुश्किल
धारचूला। रविवार रात अतिवृष्टि के कारण धारचूला-तवाघाट सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। सड़क सुधार की फिलहाल उम्मीद नहीं है। ऐसे में लोगों को करीब 15 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ेगा। इन हालातों में क्षेत्र में राशन सहित अन्य जरूरी सामान की किल्लत होने की भी आशंका है।