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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वादों पर सुनवाई मामले में पुनर्विचार करने की मांग
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नैनीताल। उत्तराखंड बार कांउसिल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह पुंडीर ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर जिला न्यायालयों में कल (आज) से अर्जेंट वादों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
पत्र में कहा है कि जिला न्यायालय के अधिकांश अधिवक्ताओं के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के संसाधन व तकनीकी जानकारी का अभाव है। हाईकोर्ट ने 12 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर 15 अप्रैल से जिला न्यायालयों में अर्जेंट वादों की सुनवाई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किये जाने के आदेश दिए थे।
इस संदर्भ में कई जिला बार एसोसिएशनों व कई अन्य अधिवक्ताओं ने उत्तराखंड बार कौंसिल को पत्र लिखकर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने वाली सुनवाई से उत्पन्न दिक्कतों से अवगत कराया है। बार कौंसिल अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने विभिन्न जिलों से आये पत्रों का हवाला देते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है।
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जिसमें उन्होंने कहा है कि जिलों में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिये इंटरनेट की पर्याप्त स्पीड नहीं है और कई अधिवक्ताओं के पास स्मार्ट फोन व इंटरनेट की सुविधा तक नहीं है। जिनके पास यह सुविधा है भी उन्हें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग करना नहीं आता। जिन्हें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के संदर्भ में प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 3 मई तक लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है। जिससे कोर्ट के कार्मिकों को भी ऑफिस आने में दिक्कतें होंगी।
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पत्र में कहा है कि जिला न्यायालय के अधिकांश अधिवक्ताओं के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के संसाधन व तकनीकी जानकारी का अभाव है। हाईकोर्ट ने 12 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर 15 अप्रैल से जिला न्यायालयों में अर्जेंट वादों की सुनवाई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किये जाने के आदेश दिए थे।
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इस संदर्भ में कई जिला बार एसोसिएशनों व कई अन्य अधिवक्ताओं ने उत्तराखंड बार कौंसिल को पत्र लिखकर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने वाली सुनवाई से उत्पन्न दिक्कतों से अवगत कराया है। बार कौंसिल अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने विभिन्न जिलों से आये पत्रों का हवाला देते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है।
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जिसमें उन्होंने कहा है कि जिलों में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिये इंटरनेट की पर्याप्त स्पीड नहीं है और कई अधिवक्ताओं के पास स्मार्ट फोन व इंटरनेट की सुविधा तक नहीं है। जिनके पास यह सुविधा है भी उन्हें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग करना नहीं आता। जिन्हें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के संदर्भ में प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 3 मई तक लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है। जिससे कोर्ट के कार्मिकों को भी ऑफिस आने में दिक्कतें होंगी।