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नरेंद्र को अकेला छोड़ चली दीपिका
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sat, 21 Mar 2015 02:09 AM IST
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25 फरवरी को दार्जिलिंग जू से नैनीताल लाए गए मारखोर के जोड़े में से मादा मारखोर दीपिका की बृहस्पतिवार रात मौत हो गई। मारखोर का पोस्टमार्टम कर जला दिया गया है। मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है। मादा मारखोर की मौत की वजह शरीर में सेप्टीसीनियां और टाक्सीमियां बताया गया है। दीपिका की मौत के बाद अब नर मारखोर नरेंद्र अकेला रह गया है।
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नैनीताल जू में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नैनीताल जू का दार्जिलिंग जू से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति से करार हुआ है कि वह एक-दूसरे को नई प्रजातियों के वन्यजीवों का आदान-प्रदान करेंगे। इसी के तहत 25 फरवरी को दार्जिलिंग जू से मारखोर का जोड़ा यहां लाया गया था। इसके बदले कलीज फीजेंट का जोड़ा दार्जिलिंग जू प्रबंधन को दिया गया था।
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डा. योगेश भारद्वाज और डा. एलके सनवाल के पैनल ने मारखोर का पोस्टमार्टम कर उसका अंतिम संस्कार कराया। पैनल में शामिल जू के डा. योगेश भारद्वाज ने बताया कि मारखोर दीपिका के शरीर में इंफेक्शन होने से उसका खून जहरीला हो गया था। इस वजह से उसे सेप्टीसीनियां और टाक्सीमियां होने से उसकी मौत हो गई। 25 फरवरी को दार्जिलिंग जू के डा. उत्तम प्रधान और प्रदीप मारखोर के जोड़े को नैनीताल जू लेकर आए थे।
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दार्जिलिंग से जो टीम मारखोर के जोड़े को लेकर यहां आई थी। उसने बिल्कुल भी देखभाल नहीं की। लखनऊ समेत कई स्थानों से होकर इस जोड़े को लाया गया। वाहन को इतनी तेज रफ्तार से लाया गया कि मादा मारखोर के पीछे के दोनों पैर फ्रेक्चर हो गए थे। इस वजह से उसमें इंफेक्शन हुआ। उसे कुछ दिन पूर्व पंतनगर भी जांच के लिए ले गए थे। जल्द ही मादा मारखोर यहां लाई जाएगी, लेकिन अब नैनीताल जू प्रबंधन किसी दूसरे जू प्रबंधन के सहारे नहीं रहकर मारखोर को सुरक्षित यहां लाने के लिए अपनी निजी व्यवस्था करेगा। भविष्य में कोई भी वन्यजीव अब दूसरे जू के भरोसे नहीं लाए जाएंगे।