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देवस्थानम प्रबंधन एक्ट मामले में अपने हक में आएगा फैसला : स्वामी
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प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना है कि हाईकोर्ट में देवस्थानम प्रबंधन एक्ट के खिलाफ दायर की याचिका का फैसला उनके पक्ष में आएगा। इससे पहले भी वह तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में ऐसे कई केस जीत चुके हैं।
मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दार करने के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनी और एडवोकेट जनरल को लिखित जवाब देने के आदेश दिए। सोमवार रात जब वह याचिका तैयार करा रहे थे तभी सरकार ने चारधाम मामले में सीईओ नियुक्त कर दिया, जबकि उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि जब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं आता तब तक कार्रवाई पर रोक लगाएं।
न्यायालय ने सरकार से इस पर भी जवाब मांगा है। धार्मिक संस्थाओं में गड़बड़ी को आधार बनाकर सरकार उनका नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले सकती है। सरकार को यदि कहीं कोई गड़बड़ी मिले तो उसकी जांच कराए और दोषियों को हटाए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह याचिका वह किसी तरह की पब्लिसिटी लेने के लिए दायर नहीं कर रहे हैं।
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कांग्रेस के इस एक्ट का विरोध करने के सवाल पर स्वामी ने कहा कि कांग्रेस का विरोध केवल तब तक है, जब तक उसके पास पावर नहीं है। उत्तराखंड की सरकार केवल चारधाम का नियंत्रण लेने की बात कहती है लेकिन हकीकत यह है कि यहां भी 52 अन्य मंदिरों का नियंत्रण सरकार ने लिया है। एक्ट में यह कहीं नहीं लिखा है कि सरकार मंदिरों के लिए पुजारी नामित करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के बाद भी हम अंग्रेजों के जमाने के बनाए गए नियमों को पकड़कर क्यों बैठे हैं? हमें संविधान और संस्कृति के अनुसार सोचना और निर्णय लेना चाहिए। लोकतंत्र में उनका अधिकार है कि जब पार्टी लाइन से भटके तो उसे लाइन पर लाने के लिए काम कर सकूं।
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मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दार करने के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनी और एडवोकेट जनरल को लिखित जवाब देने के आदेश दिए। सोमवार रात जब वह याचिका तैयार करा रहे थे तभी सरकार ने चारधाम मामले में सीईओ नियुक्त कर दिया, जबकि उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि जब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं आता तब तक कार्रवाई पर रोक लगाएं।
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न्यायालय ने सरकार से इस पर भी जवाब मांगा है। धार्मिक संस्थाओं में गड़बड़ी को आधार बनाकर सरकार उनका नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले सकती है। सरकार को यदि कहीं कोई गड़बड़ी मिले तो उसकी जांच कराए और दोषियों को हटाए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह याचिका वह किसी तरह की पब्लिसिटी लेने के लिए दायर नहीं कर रहे हैं।
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कांग्रेस के इस एक्ट का विरोध करने के सवाल पर स्वामी ने कहा कि कांग्रेस का विरोध केवल तब तक है, जब तक उसके पास पावर नहीं है। उत्तराखंड की सरकार केवल चारधाम का नियंत्रण लेने की बात कहती है लेकिन हकीकत यह है कि यहां भी 52 अन्य मंदिरों का नियंत्रण सरकार ने लिया है। एक्ट में यह कहीं नहीं लिखा है कि सरकार मंदिरों के लिए पुजारी नामित करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के बाद भी हम अंग्रेजों के जमाने के बनाए गए नियमों को पकड़कर क्यों बैठे हैं? हमें संविधान और संस्कृति के अनुसार सोचना और निर्णय लेना चाहिए। लोकतंत्र में उनका अधिकार है कि जब पार्टी लाइन से भटके तो उसे लाइन पर लाने के लिए काम कर सकूं।