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काशीपुर के मिनी बैंक घोटाला मामले में निर्णय सुरक्षित
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हाईकोर्ट की खबर-5
काशीपुर के मिनी बैंक घोटाला मामले में निर्णय सुरक्षित
नैनीताल। हाईकोर्ट ने काशीपुर में मिनी बैंक की ओर से गबन किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अकरम अली ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि काशीपुर में महुखेडा गंज में दक्षिणी काशीपुर सहकारी समिति लिमिटेड का मिनी बैंक था जो कि जिला सहकारी बैंक रुद्रपुर के अधीन था। तत्कालीन मैनेजर रईस अहमद ने ग्राहकों से प्राप्त जमाराशि को बैंक में जमा न कर उसका गबन किया। यह राशि तीन करोड़ के लगभग है। जांच में 1.56 करोड़ और दोबारा 2014 में हुई जांच में 1.30 करोड़ के घपले की पुष्टि हुई। याचिका में कहा कि सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। यह मुकदमा भ्रष्टाचार की धाराओं में दर्ज न कर सामान्य धाराओं में दर्ज हुआ और आरोपी की धमकी के बाद विभाग ने रिपोर्ट वापस ले ली। वर्तमान सहकारी समिति के एमडी ने पुन: पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई और मामला काशीपुर न्यायालय में विचाराधीन है साथ ही आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में है। याचिका में कहा कि लगभग तीन करोड़ के घपले में और लोग भी शामिल होंगे इसलिए इस मामले की जांच आरबीआई या सीबीआई से कराई जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है। संवाद
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काशीपुर के मिनी बैंक घोटाला मामले में निर्णय सुरक्षित
नैनीताल। हाईकोर्ट ने काशीपुर में मिनी बैंक की ओर से गबन किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अकरम अली ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि काशीपुर में महुखेडा गंज में दक्षिणी काशीपुर सहकारी समिति लिमिटेड का मिनी बैंक था जो कि जिला सहकारी बैंक रुद्रपुर के अधीन था। तत्कालीन मैनेजर रईस अहमद ने ग्राहकों से प्राप्त जमाराशि को बैंक में जमा न कर उसका गबन किया। यह राशि तीन करोड़ के लगभग है। जांच में 1.56 करोड़ और दोबारा 2014 में हुई जांच में 1.30 करोड़ के घपले की पुष्टि हुई। याचिका में कहा कि सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। यह मुकदमा भ्रष्टाचार की धाराओं में दर्ज न कर सामान्य धाराओं में दर्ज हुआ और आरोपी की धमकी के बाद विभाग ने रिपोर्ट वापस ले ली। वर्तमान सहकारी समिति के एमडी ने पुन: पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई और मामला काशीपुर न्यायालय में विचाराधीन है साथ ही आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में है। याचिका में कहा कि लगभग तीन करोड़ के घपले में और लोग भी शामिल होंगे इसलिए इस मामले की जांच आरबीआई या सीबीआई से कराई जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है। संवाद