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Nainital News: ज्योलीकोट के पानी में मिले फीकल कॉलिफॉर्म और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे घातक बैक्टीरिया
Thu, 17 Sep 2026 01:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:32 AM IST
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हल्द्वानी।
ज्योलीकोट में पानी के संक्रमण का मुख्य कारण वहां स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों का मानव के मल से दूषित होना है। इसके चलते ही पानी में कोलीफार्म, ई-कोलाई, फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे घातक और जानलेवा बैक्टीरिया पनप गए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से लिए गए पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद जल संस्थान की प्रयोगशाला में हुई पानी की जांच भी सवालों के दायरे में आ गई है। अब सैंपल लेने के लिए टीम दोबारा भेजी गई है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक मनोरा, बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी स्थित चीनागांव, पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय के समीप पेयजल स्रोत, देवुबागांजा वाटर टैंक, पीएमजीएसवाई आफिस के समीप स्थित स्रोत, चौपड़ा के बुशगांव वाटर टैंक व सरियाताल स्थित टैंक से लिए गए नमूनों में कॉलिफॉर्म और ईकोलाई जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। प्रति 100 एमएल पानी में इनकी मात्रा कहीं 170 से लेकर 2200 तक रिकॉर्ड की गई है जबकि मनोरा बेलुवाखान वाटर टैंक, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी, चीना गांव आदि से लिए गए सैंपलों में फीकल कालीफार्म और फीकल स्प्रैक्ट्रोकोकस जैसे बैक्टीरिया मिले हैं।
क्या है फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस?
फीकल कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया का एक समूह है जो मल में पाया जाता है। इनकी उपस्थिति पेयजल में मल के प्रदूषण का संकेत देती है। फीकल स्ट्रेप्टोकोकस भी मल से पानी के प्रदूषित होने का कारण है।
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बैक्टीरिया से मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान
पेयजल में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस की उपस्थिति गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। यह मानव और जानवरों के मल से आता है। इनके सेवन से पीलिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ये बैक्टीरिया बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक होता है। इनकी उपस्थिति पेयजल की गुणवत्ता में गिरावट और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।
पेयजल में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया की उपस्थिति एक गंभीर चिंता का विषय है। यह सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और जल जनित बीमारियों का कारण बनता है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जल स्रोतों और पेयजल लाइनों की नियमित जांच और रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- डा. नीलांबर भट्ट वरिष्ठ फीजिशियन हल्द्वानी।
आठ सितंबर को ज्योलीकोट में दस स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे। स्थानीय प्रयोगशाला के अलावा देहरादून स्थित मुख्य प्रयोगशाला में इन सैंपलों की जांच कराई गई। जांच में पानी में घातक बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। अब एक बार फिर से विभागीय टीम को वहां पानी के सैंपल लेने के लिए भेजा गया है।
-अनुराग नेगी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हल्द्वानी
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ज्योलीकोट में पानी के संक्रमण का मुख्य कारण वहां स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों का मानव के मल से दूषित होना है। इसके चलते ही पानी में कोलीफार्म, ई-कोलाई, फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे घातक और जानलेवा बैक्टीरिया पनप गए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से लिए गए पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद जल संस्थान की प्रयोगशाला में हुई पानी की जांच भी सवालों के दायरे में आ गई है। अब सैंपल लेने के लिए टीम दोबारा भेजी गई है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक मनोरा, बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी स्थित चीनागांव, पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय के समीप पेयजल स्रोत, देवुबागांजा वाटर टैंक, पीएमजीएसवाई आफिस के समीप स्थित स्रोत, चौपड़ा के बुशगांव वाटर टैंक व सरियाताल स्थित टैंक से लिए गए नमूनों में कॉलिफॉर्म और ईकोलाई जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। प्रति 100 एमएल पानी में इनकी मात्रा कहीं 170 से लेकर 2200 तक रिकॉर्ड की गई है जबकि मनोरा बेलुवाखान वाटर टैंक, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी, चीना गांव आदि से लिए गए सैंपलों में फीकल कालीफार्म और फीकल स्प्रैक्ट्रोकोकस जैसे बैक्टीरिया मिले हैं।
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क्या है फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस?
फीकल कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया का एक समूह है जो मल में पाया जाता है। इनकी उपस्थिति पेयजल में मल के प्रदूषण का संकेत देती है। फीकल स्ट्रेप्टोकोकस भी मल से पानी के प्रदूषित होने का कारण है।
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बैक्टीरिया से मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान
पेयजल में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस की उपस्थिति गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। यह मानव और जानवरों के मल से आता है। इनके सेवन से पीलिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ये बैक्टीरिया बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक होता है। इनकी उपस्थिति पेयजल की गुणवत्ता में गिरावट और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।
पेयजल में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया की उपस्थिति एक गंभीर चिंता का विषय है। यह सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और जल जनित बीमारियों का कारण बनता है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जल स्रोतों और पेयजल लाइनों की नियमित जांच और रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- डा. नीलांबर भट्ट वरिष्ठ फीजिशियन हल्द्वानी।
आठ सितंबर को ज्योलीकोट में दस स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे। स्थानीय प्रयोगशाला के अलावा देहरादून स्थित मुख्य प्रयोगशाला में इन सैंपलों की जांच कराई गई। जांच में पानी में घातक बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। अब एक बार फिर से विभागीय टीम को वहां पानी के सैंपल लेने के लिए भेजा गया है।
-अनुराग नेगी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हल्द्वानी