फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Cry for drinking water in rural areas

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए हाहाकार

Fri, 29 May 2015 02:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 29 May 2015 02:25 AM IST
विज्ञापन

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नौ ट्यूबवेल लो वोल्टेज के कारण नहीं चल पा रहे हैं। जबकि रिसाव के कारण पांच एमएलडी पानी बर्बाद हो रहा है और चार ओवरहेड टैंक जल संस्थान को हस्तांतरित होने के बाद भी ठूंठ की तरह खड़े हैं। इस सबके कारण लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

विज्ञापन


गर्मियों के साथ ही पानी की मांग बढ़ गई है। शहर को पर्याप्त जलापूर्ति के लिए 34 एमएलडी पानी की आवश्यकता है। लीकेज के कारण करीब पांच एमएलडी पानी बर्बाद हो रहा है और विभागीय अधिकारी संसाधनों और बजट का हवाला देकर मौन साधे हुए हैं।
विज्ञापन


दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में फत्ताबंगर, जयपुर बीसा, अर्जुनपुर, तेजपुर नेगी, भट्ट कालोनी, शहरी क्षेत्र में हीरानगर, खंडेलवाल पार्क, एमबी डिग्री कालेज और राजपुरा के ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। इन क्षेत्रों में सिर्फ सुबह एक से दो घंटे की आपूर्ति हो रही है। जल संस्थान के सहायक अभियंता आरपी डोबवाल ने बताया कि ट्यूबवेल चलाने के लिए 380 से 400 वोल्ट की जरूरत होती है मगर वोल्टेज इससे कम मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी ओर एडीबी ने चार ओवरहेड टैंक 13 बीघा, राजपुरा प्रथम-द्वितीय, हीरा नगर और डिग्री कालेज जल संस्थान को हस्तांतरित कर दिए हैं। ओवरहेड टैंक हस्तांतरित होने के बावजूद ठूंठ की तरह खड़े हुए हैं। डोबवाल का कहन है कि वोल्टेज न होने के कारण ओवरहेड टैंक नहीं भर पा रहे हैं।

अब जनरेटर से चलेंगे ट्यूबवेल
हल्द्वानी। जल संस्थान हल्दूचौड़, तेजपुर नेगी, भट्ट कालोनी, आजाद नगर, राजपुरा और कालाढूंगी के ट्यूबवेलों को जेनरेटर से चलाएगा। सहायक अभियंता आरपी डोबवाल ने बताया कि वोल्टेज कम होने पर जेनरेटर का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जेनरेटर सुबह और शाम चार-चार घंटे चलेंगे।

मैडम तो ऐसे लगेंगे स्टेबलाइजर
हल्द्वानी। एक ओर वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश जून के प्रथम सप्ताह से ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगने की बात कर रही हैं तो दूसरी ओर विभागीय अधिकारी स्टेबलाइजर लगने में दो से तीन माह का समय लगने की बात कह रहे हैं। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता का कहना है कि नई तकनीक के स्टेबलाइजर का आर्डर कंपनी को दिया गया है।


यह स्टेबलाइजर 280 वोल्टेज मिलने पर भी ट्यूबवेल को चला सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ग्रामीण क्षेत्रों के ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगेंगे और इसमें दो से तीन माह का समय लगेगा। जबकि राज्य के शहरी क्षेत्रों में स्टेबलाइजर लगाने के लिए सरकार से 18 करोड़ रुपये की धनराशि की मांग की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed