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करंट लगने पर पोल से गिरे युवक की मौत पर बखेड़ा
Fri, 19 Apr 2019 02:19 AM IST
naveen chandra joshi
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: naveen chandra joshi
Updated Fri, 19 Apr 2019 02:19 AM IST
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मजदूर राकेश सिसौदिया की मौत पर कोतवाली में प्रदर्शन करते परिजन और लोग
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी मंडी शनि बाजार में बुधवार की शाम खंभे पर तार जोड़ रहे एक कंपनी के कर्मचारी करंट लगने से गिर पड़ा। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना से नाराज लोग शव लेकर कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
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जवाहर नगर वार्ड 15 निवासी राकेश सिसौदिया (25) पुत्र दयाराम ठेकेदार जहीर आलम के अधीन जीओ की केबल बिछा रहा था। वह बुधवार की शाम बड़ी मंडी शनि बाजार स्थित टावर पर काम करने के बाद तार जोड़ने के लिए पोल पर चढ़ गया। खंभे के तार में 11 हजार वोल्टेज की बिजली की लाइन चालू थी। अचानक करंट लगने से राकेश नीचे गिर पड़ा। लोग उसे एसटीएच ले गए लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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पड़ोसियों का आरोप था कि घटना के बाद ठेकेदार भाग गया। रात में मजदूर के परिजनों और ठेकेदार के बीच बात हुई मगर समझौता नहीं हो पाया। इससे नाराज होकर परिजन और पड़ोसी पोस्टमार्टम के बाद राकेश के शव को लेकर कोतवाली पहुंच गए। उनका कहना था कि राकेश आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। उसकी दो बेटियां हैं। एसएसआई विजय सिंह मेहता ने कहा कि वह मुआवजा दिला नहीं सकते हैं। काफी समझाने के बाद लोग मान गए।
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पुलिस ठेकेदार की लापरवाही मान रही
थानाध्यक्ष दिनेश नाथ महंत का कहना था कि खंभे पर चढ़ने से पहले ठेकेदार को बिजली विभाग से शट डाउन लेना चाहिए था। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने पर पुलिस जांच करेगी।
बड़ा सवाल
1. लाइन में काम करते समय शट डाउन क्यों नहीं लिया गया
2. पूर्व में हुई इसी प्रकार की घटनाओं से सबक क्यों नहीं लिया गया
3. मजदूर के पास सुरक्षा के पर्याप्त सामान क्यों नहीं थे
साल भर में 74 हादसे, 27 ने जान गंवाई
हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में एक साल में करंट लगने से मौत होने और शार्ट सर्किट से हुए अग्निकांड की कुल 74 घटनाएं हुई हैं। इनमें 27 लोगों को जान गंवा चुके हैं जबकि 23 पशु भी मौत के मुंह में समा चुके हैं। इनमें नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक हादसे हुए हैं। विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बीते एक साल में 47 घातक श्रेणी की, 19 अघातक श्रेणी की थी जबकि आठ मामले अग्निकांड के थे। सर्वाधिक 36 दुर्घटनाएं ऊधमसिंह नगर में हुईं। नैनीताल जिले में 17 हादसे हुए जिसमें 10 घातक रहे। चार लोगों की मौत हुई और सात पशु मारे गए। पांच अघातक दुर्घटनाओं में पांच पशु मारे गए जबकि अग्निकांड के दो मामले रिकार्ड हुए। अल्मोड़ा जिले में साल भर में 12 विद्युत दुर्घटनाएं हुई जिसमें घातक श्रेणी के सात मामलों में पांच लोगों की मौत हुई और दो पशु मारे गए। अघातक श्रेणी के पांच मामलों में छह लोग घायल हुए। चंपावत जिले में तीन घातक विद्युत हादसों में तीन लोगों की मौत हुई जबकि एक मामला अग्निकांड का घटा। बागेश्वर में एक घातक दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई। पिथौरागढ़ जिले में अघातक श्रेणी के चार मामले घटित हुए जिनमें जान जाने जैसी कोई घटना नहीं हुई।