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दहेज हत्या में पति को सात साल कैद
ब्यूूराे, अमर उजाला, नैनीताल।
Updated Wed, 12 Aug 2015 12:36 AM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील तोमर की अदालत ने दहेज के लिए विवाहिता की हत्या करने पर उसके पति को सात साल की सजा सुनाई। साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
आरोप है कि हैसियत के अनुसार दान-दहेज देने के बावजूद ससुराली उसकी पुत्री को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। 30 जनवरी को शांति अपने पति के साथ मायके एक विवाह समारोह में आई थी।
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दूसरे दिन वापसी पर दामाद ने 50 हजार रुपये दहेज की मांग की। आरोप था कि वह अपने साथ शांति और अपनी एक वर्षीय बेटी को साथ ले गया, लेकिन रुपये न देने पर धमकी भी दे गया।
दूसरे दिन उन्हें शांति की मौत का सामाचार मिला, जो आग की भेंट चढ़ाई गई थी। पुलिस ने पति, ससुर, सास व देवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 302 व 304बी के तहत मुकदमा दर्ज किया।
वाद की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पति को दोषी माना जबकि अन्य ससुरालियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने आरोपी पति को धारा 498 ए में दो वर्ष की सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने तथा 304 बी में 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अतुल साह और अनीता जोशी ने पैरवी की।
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भीमताल निवासी जयदत्त पलड़िया ने एक फरवरी-2010 को भीमताल थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। कहा कि वर्ष 2006 में उन्होंने अपनी पुत्री शांति का विवाह कमलेश चंद्र पलड़िया पुत्र चंद्र दत्त पलड़िया निवासी बूढ़ाधूरा जंगलियागांव के साथ किया था।
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आरोप है कि हैसियत के अनुसार दान-दहेज देने के बावजूद ससुराली उसकी पुत्री को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। 30 जनवरी को शांति अपने पति के साथ मायके एक विवाह समारोह में आई थी।
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दूसरे दिन वापसी पर दामाद ने 50 हजार रुपये दहेज की मांग की। आरोप था कि वह अपने साथ शांति और अपनी एक वर्षीय बेटी को साथ ले गया, लेकिन रुपये न देने पर धमकी भी दे गया।
दूसरे दिन उन्हें शांति की मौत का सामाचार मिला, जो आग की भेंट चढ़ाई गई थी। पुलिस ने पति, ससुर, सास व देवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 302 व 304बी के तहत मुकदमा दर्ज किया।
वाद की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पति को दोषी माना जबकि अन्य ससुरालियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने आरोपी पति को धारा 498 ए में दो वर्ष की सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने तथा 304 बी में 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अतुल साह और अनीता जोशी ने पैरवी की।