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फर्जी प्रमाण पत्र मामले में कर्मचारी को तीन साल की सजा
Updated Sun, 25 Feb 2018 02:32 AM IST
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हल्द्वानी। एसीजेएम मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने फर्जी प्रमाण पत्र मामले में दोषी कर्मचारी को तीन साल का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। कर्मचारी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत था।
सहायक अभियोजन अधिकारी दीपारानी के अनुसार पंचशील कालोनी बड़ी मुखानी निवासी अमित कुमार नेगी पुत्र स्वर्गीय अरुण कुमार नेगी लोक निर्माण विभाग अधीक्षण अभियंता कार्यालय में अनुसेवक के पद पर कार्यरत थे। अनुसेवक की कनिष्ठ सहायक के पद पर प्रोन्नति से पहले मई 2012 में विभागीय जांच कराई गई। अधिकारियों की जांच में पता चला कि अनुसेवक का हाईस्कूल का प्रमाणपत्र फर्जी है। इस मामले में कार्यालय के प्रमुख ललित कुमार ने कोतवाली थाने में धारा 420, 465, 468, 421 के तहत अनुसेवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। उपनिरीक्षक मोहन चंद पांडे ने इस मामले में विवेचना के बाद कर्मचारी अमित को दोषी पाते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में अभियोजन ने साक्ष्य के समर्थन में छह गवाहों को पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी अनुसेवक को तीन साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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सहायक अभियोजन अधिकारी दीपारानी के अनुसार पंचशील कालोनी बड़ी मुखानी निवासी अमित कुमार नेगी पुत्र स्वर्गीय अरुण कुमार नेगी लोक निर्माण विभाग अधीक्षण अभियंता कार्यालय में अनुसेवक के पद पर कार्यरत थे। अनुसेवक की कनिष्ठ सहायक के पद पर प्रोन्नति से पहले मई 2012 में विभागीय जांच कराई गई। अधिकारियों की जांच में पता चला कि अनुसेवक का हाईस्कूल का प्रमाणपत्र फर्जी है। इस मामले में कार्यालय के प्रमुख ललित कुमार ने कोतवाली थाने में धारा 420, 465, 468, 421 के तहत अनुसेवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। उपनिरीक्षक मोहन चंद पांडे ने इस मामले में विवेचना के बाद कर्मचारी अमित को दोषी पाते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में अभियोजन ने साक्ष्य के समर्थन में छह गवाहों को पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी अनुसेवक को तीन साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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