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डीएनए जांच पुलिस के लिए वरदान

Wed, 20 Feb 2019 01:42 AM IST
madan singh Madan Singh
Updated Wed, 20 Feb 2019 01:42 AM IST
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डीएनए जांच पुलिस के लिए वरदान
fsd - फोटो : Getty Images
हल्द्वानी। हत्या या दुष्कर्म के घटनास्थल पर गिरा अभियुक्त का थूक और बाल साक्ष्य के लिए काफी हैं। डीएनए जांच कराने के बाद पुलिस अपराधी को पहचान सकती है। अदालत में गवाह मुकर सकता है लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य अकाट्य होता है, इससे अपराधी को सजा मिल सकती है।
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रुद्रपुर स्थित लैब के संयुक्त निदेशक डॉ. दयाल शरण ने बताया कि पुलिस की जांच और सजा दिलाने में डीएनए जांच एक वरदान के समान है। पैतृक विवाद के मामले डीएनए के चलते देश में कई मामले सुलझे हैं। घटनास्थल पर अभियुक्त के रक्त, बाल, कपड़ों में लगे अवयव, हड्डी, मांस, थूक आदि का फोरेंसिक लैब में मिलान किया जाता है। दुष्कर्म के मामले में वैजाइनल स्वाब इकट्ठा कर संदिग्धों के खून से मिलान कराया जाता है। इस जांच से गैंगरेप या एक व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म की पुष्टि होती है। डीएनए की जांच के पहले अदालत की अनुमति लेना आवश्यक होता है। जांच के लिए संदिग्ध का पांच मिलीलीटर खून के इडटा ट्यूब (खास केमिकल की ट्यूब) में ब्लड स्पॉट लिए जाते हैं। संदिग्ध का मिलान यदि विजाइनल सीमेन से होता है तो वैज्ञानिक साक्ष्य को आधार मानकर पुलिस अपराधी को चार्जशीट करती है। हड्डी की डीएनए जांच कर आयु और लिंग का निर्धारण होता है। घाव के बारे में भी जांच से पता चल जाता है।
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डीएनए जांच पुलिस के लिए वरदान
घटनास्थल पर गिरे बाल और थूक अपराधी तक पहुंचने के लिए काफी

अपराधियों की गर्दन नहीं बच सकी
1. हल्द्वानी में 2005 में सुमन हत्याकांड हुआ था। उस समय घटनास्थल से पुलिस ने अभियुक्त का एक बाल बरामद किया था। इस मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा हुई।
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2. लालकुआं में 2012 में आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी। इस मामले में अदालत में डीएनए के आधार पर जांच हुई। अभियुक्त दीपक को फांसी की सजा हुई।
3. वर्ष 2014 में शीशमहल में छह साल की लाडली का हत्याकांड हुआ था। पुलिस ने मौके से अभियुक्त का थूक, सहित अन्य साक्ष्यों को इकट्ठा किया। गिरफ्तारी के बाद वैज्ञानिक जांच के आधार पर अभियुक्त नहीं बच सका। अभियुक्त अख्तर अली को फांसी की सजा और सह अभियुक्त प्रेमपाल को पांच साल की कारावास की सजा मिली थी।



क्या है डीएनए
डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) मानव या प्रत्येक जीव के शरीर की रचना कोशिका (सेल) से होती है। करोड़ों सेल मिलने से ऊतक (टिश्यू) बनता है और टिश्यू मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं। अंगों से मिलकर ही शरीर बनता है। प्रत्येक सेल जीवित होता है। इसी सेल के अंदर एक केंद्रक (न्यूक्लियर) होता है। इनमें डीएनए की धागानुमा सीढ़ी जैसी संरचना होती है। डीएनए में ही प्राणी के सारे गुण संरचना, बनावट, व्यवहार आदि समाहित होते हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी पैतृक होते हैं। इनको ही जींस कहा जाता है। मशहूर वैज्ञानिक वाटसन एंड क्रिक ने 1953 में डीएनए की खोज की थी।
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