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लाखों की धोखाधड़ी मामले में मुकदमा दर्ज
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:06 AM IST
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रिप्पल फर्जावाड़ा
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हल्द्वानी। लाखों की धोखाधड़ी के मामले में कोतवाली पुलिस ने व्यवसायी जवाहर लाल अग्रवाल के अलावा तत्कालीन नगर पालिका अधिकारी और एसबीआई के शाखा प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि कागजातों को छिपाकर मकान पर आरोपी ने ऋण ले लिया। बैंक अधिकारियों ने ऋण देते समय संपत्ति की जांच नहीं की।
महावीरगंज मीरामार्ग निवासी रेखा गुप्ता पत्नी प्रेमपाल कश्यप ने पुलिस को तहरीर देकर अवगत कराया कि उसके पिता स्वर्गीय नंद किशोर ने जीवित रहते हुए महावीरगंज मीरा मार्ग पर एक मकान खरीदा था। भूतल पर बाबूलाल अग्रवाल और उनके पुत्र जवाहर लाल अग्रवाल एक दुकान चलाते थे। बाबूलाल अग्रवाल ने चोरी छिपे नंदकिशोर को 40-40 हजार रुपये देकर मकान के एक हिस्से की रजिस्ट्री 1984 में करा ली। शेष भाग की रजिस्ट्री बाबूलाल अग्रवाल ने 1985 में कराने के साथ उप निबंधक कार्यालय में पंजीकरण करा लिया। एक यह भी शर्त थी कि पांच वर्ष के भीतर रुपये वापस करने पर बैनामा नंद किशोर के नाम होगा। 1987 में नंद किशोर का निधन हो गया। इस मामले में लेनदेन की बात बाबूलाल या जवाहर ने नहीं बताई। आरोप है कि उपनिबंधक कार्यालय में दर्ज दस्तावेजों का आंशिक लोप कर नगर पालिका की मिलीभगत से अभिलेखों पर बाबूलाल अग्रवाल ने अपना नाम दर्ज करा लिया। 2009 में बाबूलाल का निधन हो गया तो उनके पुत्र जवाहर ने वारिसान अपने नाम को चढ़वा लिया। इस संपत्ति पर रेखा का परिवार ही काबिज था। बैंक में जवाहर ने कागजात बंधक रखकर ऋण लिया गया। बैंक अधिकारी जब संपत्ति पर 2012 में कब्जा करने के लिए गए तो ऋण का खुलासा हुआ। इस मामले में रेखा ने बैंक को 45 लाख रुपये का भुगतान किया। आरोप था कि इस मामले में जवाहर ने परिवार को प्रताड़ित करने के साथ धमकी भी दी। रेखा ने सीओ को पत्र घटना में नगर पालिका अधिकारी और बैंक के तत्कालीन अधिकारी की भूमिका को जिम्मेदार बताया। सीओ ने जांच के बाद कोतवाली थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। एसएसआई विजय सिंह मेहता ने बताया कि इस मामले में एसबीआई के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और नगर पालिका अधिकारी के साथ जवाहर अग्रवाल के खिलाफ धारा 420, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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महावीरगंज मीरामार्ग निवासी रेखा गुप्ता पत्नी प्रेमपाल कश्यप ने पुलिस को तहरीर देकर अवगत कराया कि उसके पिता स्वर्गीय नंद किशोर ने जीवित रहते हुए महावीरगंज मीरा मार्ग पर एक मकान खरीदा था। भूतल पर बाबूलाल अग्रवाल और उनके पुत्र जवाहर लाल अग्रवाल एक दुकान चलाते थे। बाबूलाल अग्रवाल ने चोरी छिपे नंदकिशोर को 40-40 हजार रुपये देकर मकान के एक हिस्से की रजिस्ट्री 1984 में करा ली। शेष भाग की रजिस्ट्री बाबूलाल अग्रवाल ने 1985 में कराने के साथ उप निबंधक कार्यालय में पंजीकरण करा लिया। एक यह भी शर्त थी कि पांच वर्ष के भीतर रुपये वापस करने पर बैनामा नंद किशोर के नाम होगा। 1987 में नंद किशोर का निधन हो गया। इस मामले में लेनदेन की बात बाबूलाल या जवाहर ने नहीं बताई। आरोप है कि उपनिबंधक कार्यालय में दर्ज दस्तावेजों का आंशिक लोप कर नगर पालिका की मिलीभगत से अभिलेखों पर बाबूलाल अग्रवाल ने अपना नाम दर्ज करा लिया। 2009 में बाबूलाल का निधन हो गया तो उनके पुत्र जवाहर ने वारिसान अपने नाम को चढ़वा लिया। इस संपत्ति पर रेखा का परिवार ही काबिज था। बैंक में जवाहर ने कागजात बंधक रखकर ऋण लिया गया। बैंक अधिकारी जब संपत्ति पर 2012 में कब्जा करने के लिए गए तो ऋण का खुलासा हुआ। इस मामले में रेखा ने बैंक को 45 लाख रुपये का भुगतान किया। आरोप था कि इस मामले में जवाहर ने परिवार को प्रताड़ित करने के साथ धमकी भी दी। रेखा ने सीओ को पत्र घटना में नगर पालिका अधिकारी और बैंक के तत्कालीन अधिकारी की भूमिका को जिम्मेदार बताया। सीओ ने जांच के बाद कोतवाली थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। एसएसआई विजय सिंह मेहता ने बताया कि इस मामले में एसबीआई के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और नगर पालिका अधिकारी के साथ जवाहर अग्रवाल के खिलाफ धारा 420, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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