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चाचा के हत्यारोपी तीन भाईयों को आजीवन कारावस
Updated Thu, 30 Aug 2018 02:04 AM IST
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नैनीताल। चाचा की हत्या करने के आरोपी तीन भाइयों को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई दी है। वहीं मृतक के पुत्र पर जानलेवा हमले के जुर्म में दस साल के कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 अक्टूबर 2016 को खनस्यू ओखलकांडा में गजेंद्र राम और उनके लड़के के ऊपर उन्हीं के चचेरे भाइयों ने प्राणघातक हमला किया था। हमले में गजेंद्र की मौत हो गई। जिसकी नामजद रिपोर्ट मृतक के पुत्र संजय कुमार ने चैगड़ पट्टी में दर्ज कराई। आरोपी हरेंद्र पाल, मनोज, महेश और उनके पिता शंकर राम ग्राम चमोली पट्टी चैगड़ को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शंकर राम के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उसे इस मामले से बरी कर दिया। जबकि उसके तीन पुत्रों हरेंद्र, मनोज व महेश को हत्या का दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने कोर्ट में कहा की मृतक अभियुक्तों का सगा चाचा था और इनकी ओर से उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी और मृतक के पुत्र संजय कुमार की ओर से पिता को बचाने के प्रयास करने पर उस पर भी हमला किया और जान से मारने का प्रयास किया। मृतक के परिवार के लोग अभियुक्तों की डर से गांव छोड़कर चले गए हैं। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और पचास-पचास हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया और जुर्माने की राशि न देने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। वहीं मृतक के पुत्र संजय कुमार पर जानलेवा हमले के जुर्म में दस साल का कठोर कारावास और बीस बीस हजार के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना राशि न देने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अभियुक्तों की ओर से जुर्माने की राशि जमा कराने की दशा में आधी रकम को पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने के आदेश दिए हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 अक्टूबर 2016 को खनस्यू ओखलकांडा में गजेंद्र राम और उनके लड़के के ऊपर उन्हीं के चचेरे भाइयों ने प्राणघातक हमला किया था। हमले में गजेंद्र की मौत हो गई। जिसकी नामजद रिपोर्ट मृतक के पुत्र संजय कुमार ने चैगड़ पट्टी में दर्ज कराई। आरोपी हरेंद्र पाल, मनोज, महेश और उनके पिता शंकर राम ग्राम चमोली पट्टी चैगड़ को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शंकर राम के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उसे इस मामले से बरी कर दिया। जबकि उसके तीन पुत्रों हरेंद्र, मनोज व महेश को हत्या का दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने कोर्ट में कहा की मृतक अभियुक्तों का सगा चाचा था और इनकी ओर से उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी और मृतक के पुत्र संजय कुमार की ओर से पिता को बचाने के प्रयास करने पर उस पर भी हमला किया और जान से मारने का प्रयास किया। मृतक के परिवार के लोग अभियुक्तों की डर से गांव छोड़कर चले गए हैं। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और पचास-पचास हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया और जुर्माने की राशि न देने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। वहीं मृतक के पुत्र संजय कुमार पर जानलेवा हमले के जुर्म में दस साल का कठोर कारावास और बीस बीस हजार के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना राशि न देने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अभियुक्तों की ओर से जुर्माने की राशि जमा कराने की दशा में आधी रकम को पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने के आदेश दिए हैं।
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