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धोखाधड़ी कर ऋण लेने वाले 19 काश्तकारों पर केस
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:45 PM IST
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खटीमा। चकरपुर एसबीआई की शाखा के प्रबंधक द्वारा शनिवार को 19 काश्तकारों के खिलाफ दी गई तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने सभी के खिलाफ 420, 463, 467 व 468 के तहत केस दर्ज कर लिया है। वहीं, बैंक के अधिकारियों द्वारा अभिलेखों की जांच के बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर के विरुद्घ मुकदमा दर्ज होने से पहले ही निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। उनके विरुद्घ विभागीय जांच चल रही है।
एसबीआई के शाखा प्रबंधक अमित गर्ग ने कोतवाली पुलिस को 19 काश्तकारों के खिलाफ नामजद तहरीर सौंपी थी। इन काश्तकारों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी खसरा खतौनी लगाकर चार एकड़ जमीन को 14 एकड़ बनाया है। जो जमीन ऋण लेने के लिए दिखाई गई, मौके पर वह जमीन किसी और के कब्जे में है। नोटरी वकीलों की फर्जी मुहरें लगाई गई हैं। एनओसी फर्जी लगाई गई है। फर्जी दस्तावेजों को लगाकर 1.26 करोड़ रुपये छह जुलाई 2010 से सात जनवरी 2017 के बीच फसली ऋण निकाला गया। इसका खुलासा बैंक के ऑडिट में तब हुआ, जब काश्तकारों को 10-10 लाख के ऋण जारी किए गए। शाखा प्रबंधक गर्ग ने बताया कि ऑडिट में मामला पकड़ में आने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक दयाकिशन आर्य और फील्ड ऑफिसर मनोज पांडे को निलंबित किया गया है। किसानों को ऋण देने से पहले फील्ड ऑफिसर का कार्य मौके पर जाकर जमानत के तौर पर रखी गई जमीन का भौतिक सत्यापन, तहसील में खसरा खतौनी के रिकार्ड से मिलान करना होता है। ऑडिट में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर दोनों अधिकारियों को निलंबित कर उनके विरुद्घ विभागीय जांच चल रही है। इन दोनों अधिकारियों को कब निलंबित किया गया, इस बारे में गर्ग ने अनभिज्ञता व्यक्त की।
इन काश्तकारों पर दर्ज किया गया मुकदमा
हरवंश सिंह निवासी भड़ाभुडिया, बनवारी सिंह भूड़ाकिसनी, भूपेंद्र सिंह फुलैया, हरदेव सिंह गांगी, अमित सिंह गुरुखुड़ा, विष्णु सिंह फुलैया, जशरथ सिंह बानूसा, जसवीर सिंह गोझरिया, वचिन सिंह झनकट, सुरेश सिंह, रवीश सिंह, कलावती निवासी सबौर, मुकेश सिंह उलधन, अर्जुन सिंह गुरुखुड़ा, विक्रम सिंह उलधन, मुकेश, महेश सिंह, उरवेशवती निवासी पहेनिया, शांति देवी निवासी गुरुखुड़ा के विरुद्घ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
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एसबीआई के शाखा प्रबंधक अमित गर्ग ने कोतवाली पुलिस को 19 काश्तकारों के खिलाफ नामजद तहरीर सौंपी थी। इन काश्तकारों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी खसरा खतौनी लगाकर चार एकड़ जमीन को 14 एकड़ बनाया है। जो जमीन ऋण लेने के लिए दिखाई गई, मौके पर वह जमीन किसी और के कब्जे में है। नोटरी वकीलों की फर्जी मुहरें लगाई गई हैं। एनओसी फर्जी लगाई गई है। फर्जी दस्तावेजों को लगाकर 1.26 करोड़ रुपये छह जुलाई 2010 से सात जनवरी 2017 के बीच फसली ऋण निकाला गया। इसका खुलासा बैंक के ऑडिट में तब हुआ, जब काश्तकारों को 10-10 लाख के ऋण जारी किए गए। शाखा प्रबंधक गर्ग ने बताया कि ऑडिट में मामला पकड़ में आने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक दयाकिशन आर्य और फील्ड ऑफिसर मनोज पांडे को निलंबित किया गया है। किसानों को ऋण देने से पहले फील्ड ऑफिसर का कार्य मौके पर जाकर जमानत के तौर पर रखी गई जमीन का भौतिक सत्यापन, तहसील में खसरा खतौनी के रिकार्ड से मिलान करना होता है। ऑडिट में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर दोनों अधिकारियों को निलंबित कर उनके विरुद्घ विभागीय जांच चल रही है। इन दोनों अधिकारियों को कब निलंबित किया गया, इस बारे में गर्ग ने अनभिज्ञता व्यक्त की।
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इन काश्तकारों पर दर्ज किया गया मुकदमा
हरवंश सिंह निवासी भड़ाभुडिया, बनवारी सिंह भूड़ाकिसनी, भूपेंद्र सिंह फुलैया, हरदेव सिंह गांगी, अमित सिंह गुरुखुड़ा, विष्णु सिंह फुलैया, जशरथ सिंह बानूसा, जसवीर सिंह गोझरिया, वचिन सिंह झनकट, सुरेश सिंह, रवीश सिंह, कलावती निवासी सबौर, मुकेश सिंह उलधन, अर्जुन सिंह गुरुखुड़ा, विक्रम सिंह उलधन, मुकेश, महेश सिंह, उरवेशवती निवासी पहेनिया, शांति देवी निवासी गुरुखुड़ा के विरुद्घ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
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