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किसान की हार्टअटैक से मौत का मामला संदिग्ध
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:12 AM IST
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बैंक कर्ज का नोटिस मिलने से किसान की होने मौत का मामला संदिग्ध नजर आ रहा है। प्रशासन की अब तक की जांच में नोटिस से हार्टअटैक होने के अभी तक कोई साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
ग्राम बिरिया भूड़ निवासी किसान मस्सा सिंह की सोमवार की शाम कथित तौर पर मौत हो गई थी। जिसके बाद मंगलवार को उसके परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। परिजनों का आरोप था कि 70 वर्षीय बुजुर्ग मस्सा सिंह पर उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 2.25 लाख का ट्राली व तीन लाख का फसली ऋण था। 29 जून को बैंक से ऋण अदायगी का नोटिस आया था, जिसके बाद सदमे से तीन जुलाई को हार्टअटैक से किसान की मौत हो गई।
डीएम डा. नीरज खैरवाल ने एसडीएम खटीमा को जांच के आदेश दिए थे। बुधवार को तहसीलदार ग्वाल ने नानकमत्ता के प्रभारी थानाध्यक्ष खुशवंत सिंह के साथ मृतक मस्सा सिंह के घर पहुंचकर परिजनों व ग्रामीणों के बयान लिए। साथ ही गांव के प्रधान से भी मामले में जानकारी जुटाई। तहसीलदार ग्वाल ने बताया कि जांच में हार्ट अटैक की पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद परिजनों ने न तो 108 एंबुलेंस को सूचित किया और न किसी डाक्टर के पास ले गए, जिससे घटना में अभी तक मृतक की हार्टअटैक से मौत के कोई साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
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इधर, बैंक के प्रबंधक एसके मंडल ने बताया 70 वर्षीय बुजुर्ग किसान को ऋण उसके भतीजे जगजीत सिंह के साथ संयुक्त खाते पर दिया गया था और जगजीत ही कर्ज अदायगी करता था। नोटिस के बाद 29 जून को जगजीत ने ही 18 हजार रुपये जमा कराए। बताया कि ऋण के बाद पहली बार तीन किस्तें टूटी थीं।
कर्ज माफी को एकजुट हुए किसान
मृतक किसान के परिवार को मुआवजा देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
सितारगंज। बुजुर्ग किसान की संदिग्ध मौत के बाद अखिल भारतीय किसान सभा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी को लेकर किसान एकजुट हो गए हैं। उन्होंने बैठक कर मृतक बुजुर्ग किसान के परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
बुधवार को गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में अखिल भारतीय किसान सभा के किसानों ने बैठक की। जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि राज्य में कर्ज के तले दबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अब तक करीब आधा दर्जन किसान कर्ज जमा न करने की दशा में मौत को गले लगा चुके हैं। सरकार किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं दे रही है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। यही कारण है कि बैंकों से नोटिस जारी होते ही किसान हताश व निराश हो रहा है और सदमे में पहुंच रहा है। वहां पर जगीर सिंह, राजेंद्र सिंह, मासूक अली, शिवशंकर, हरदयाल सिंह, लाभ सिंह, लक्ष्मण सिंह, प्रवेश सिंह राणा, पृथ्वीपाल सिंह राणा, महिपाल सिंह, हरजीत सिंह, शिवतैन मलिक, ओमप्रकाश राणा आदि थे।
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ग्राम बिरिया भूड़ निवासी किसान मस्सा सिंह की सोमवार की शाम कथित तौर पर मौत हो गई थी। जिसके बाद मंगलवार को उसके परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। परिजनों का आरोप था कि 70 वर्षीय बुजुर्ग मस्सा सिंह पर उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 2.25 लाख का ट्राली व तीन लाख का फसली ऋण था। 29 जून को बैंक से ऋण अदायगी का नोटिस आया था, जिसके बाद सदमे से तीन जुलाई को हार्टअटैक से किसान की मौत हो गई।
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डीएम डा. नीरज खैरवाल ने एसडीएम खटीमा को जांच के आदेश दिए थे। बुधवार को तहसीलदार ग्वाल ने नानकमत्ता के प्रभारी थानाध्यक्ष खुशवंत सिंह के साथ मृतक मस्सा सिंह के घर पहुंचकर परिजनों व ग्रामीणों के बयान लिए। साथ ही गांव के प्रधान से भी मामले में जानकारी जुटाई। तहसीलदार ग्वाल ने बताया कि जांच में हार्ट अटैक की पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद परिजनों ने न तो 108 एंबुलेंस को सूचित किया और न किसी डाक्टर के पास ले गए, जिससे घटना में अभी तक मृतक की हार्टअटैक से मौत के कोई साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
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इधर, बैंक के प्रबंधक एसके मंडल ने बताया 70 वर्षीय बुजुर्ग किसान को ऋण उसके भतीजे जगजीत सिंह के साथ संयुक्त खाते पर दिया गया था और जगजीत ही कर्ज अदायगी करता था। नोटिस के बाद 29 जून को जगजीत ने ही 18 हजार रुपये जमा कराए। बताया कि ऋण के बाद पहली बार तीन किस्तें टूटी थीं।
कर्ज माफी को एकजुट हुए किसान
मृतक किसान के परिवार को मुआवजा देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
सितारगंज। बुजुर्ग किसान की संदिग्ध मौत के बाद अखिल भारतीय किसान सभा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी को लेकर किसान एकजुट हो गए हैं। उन्होंने बैठक कर मृतक बुजुर्ग किसान के परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
बुधवार को गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में अखिल भारतीय किसान सभा के किसानों ने बैठक की। जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि राज्य में कर्ज के तले दबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अब तक करीब आधा दर्जन किसान कर्ज जमा न करने की दशा में मौत को गले लगा चुके हैं। सरकार किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं दे रही है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। यही कारण है कि बैंकों से नोटिस जारी होते ही किसान हताश व निराश हो रहा है और सदमे में पहुंच रहा है। वहां पर जगीर सिंह, राजेंद्र सिंह, मासूक अली, शिवशंकर, हरदयाल सिंह, लाभ सिंह, लक्ष्मण सिंह, प्रवेश सिंह राणा, पृथ्वीपाल सिंह राणा, महिपाल सिंह, हरजीत सिंह, शिवतैन मलिक, ओमप्रकाश राणा आदि थे।