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स्टांप में बेची जा रही है निगम की दुकानें
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nagarnigam.jpg
हल्द्वानी। नगर निगम की दुकानें खुलेआम बेची जा रही हैं। यह किराएदारी नियम का उल्लंघन है। इसके बाद भी नगर निगम दुकानों का नामांतरण कर रहा है। कुछ पार्षदों ने इसकी जांच उच्च स्तरीय कमेटी से कराने की मांग की है। नगर निगम के अधिकारी ऐसा पहले से होने की बात कह रहे हैं। नगर निगम की दुकानों में काबिज किराएदार ही नगर निगम की दुकानों को मोटे मुनाफे में बेच रहे हैं। नगर निगम सूत्रों की माने तो कार्यकारिणी समिति नियमविरुद्ध नामांतरण कर रही है। उनका कहना है कि इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तो इस मामले में कई खुलासे हो सकते हैं।
दुकान खरीदने-बेचने को ये तोड़ निकाला
व्यापारियों ने नगर निगम की दुकानों को खरीदने-बेचने के लिए एक तय फार्मेट बना रखा है। दुकानों को खरीदने-बेचने के लिए इसी फार्मेट का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें फार्मेट में कुछ ऐसा लिखा जाता है कि ‘मैं (किराएदार) लंबे समय से अस्वस्थ हूं, मेरे व्यवसाय पार्टनरशिप में है। इस व्यवसाय को मेरा पार्टनर चलाएगा। इसलिए किराएदारी उसके नाम कर दी जाए’।
क्या कहता है नियम
नगर निगम के किराएदारी नियम में साफ लिखा है कि किराएदार न तो किसी को दुकान बेच सकता है। न इस दुकान में कोई किराएदार रख सकता है। न दुकान का स्वरूप बदल सकता है। अगर वह ऐसा करता है तो उसकी किराएदारी खत्म कर दी जाएगी।
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नगर आयुक्त ने नामांतरण से अपने को किया अलग
नगर निगम की दुकानों के नामांतरण में नगर आयुक्त की सहमति भी चाहिए। नगर आयुक्त को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में रहना होता है, लेकिन नगर आयुक्त ने कार्यकारिणी की बैठक से खुद को अलग किया है। शुक्रवार को जब कार्यकारिणी की बैठक हो रही थी तब नगर आयुक्त नगर निगम में ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कार्यकारिणी की बैठक में भाग नहीं लिया।
कोट
मेयर के दबाव में नियम विरुद्ध निगम की दुकानों के नामांतरण किए जा रहे हैं, ये किराएदारी नियम का भी उल्लंघन है। मेयर के दबाव के कारण नगर आयुक्त ने नामांतरण से अपने को अलग कर दिया है। अब तक हुए नामांतरण की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच होनी चाहिए।
रवि जोशी पार्षद
नगर पालिका के समय से यह नियम चलता आ रहा है। उसके तहत नामांतरण किए जा रहे हैं। -विजेंद्र चौहान, सहायक नगर आयुक्त
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दुकान खरीदने-बेचने को ये तोड़ निकाला
व्यापारियों ने नगर निगम की दुकानों को खरीदने-बेचने के लिए एक तय फार्मेट बना रखा है। दुकानों को खरीदने-बेचने के लिए इसी फार्मेट का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें फार्मेट में कुछ ऐसा लिखा जाता है कि ‘मैं (किराएदार) लंबे समय से अस्वस्थ हूं, मेरे व्यवसाय पार्टनरशिप में है। इस व्यवसाय को मेरा पार्टनर चलाएगा। इसलिए किराएदारी उसके नाम कर दी जाए’।
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क्या कहता है नियम
नगर निगम के किराएदारी नियम में साफ लिखा है कि किराएदार न तो किसी को दुकान बेच सकता है। न इस दुकान में कोई किराएदार रख सकता है। न दुकान का स्वरूप बदल सकता है। अगर वह ऐसा करता है तो उसकी किराएदारी खत्म कर दी जाएगी।
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नगर आयुक्त ने नामांतरण से अपने को किया अलग
नगर निगम की दुकानों के नामांतरण में नगर आयुक्त की सहमति भी चाहिए। नगर आयुक्त को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में रहना होता है, लेकिन नगर आयुक्त ने कार्यकारिणी की बैठक से खुद को अलग किया है। शुक्रवार को जब कार्यकारिणी की बैठक हो रही थी तब नगर आयुक्त नगर निगम में ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कार्यकारिणी की बैठक में भाग नहीं लिया।
कोट
मेयर के दबाव में नियम विरुद्ध निगम की दुकानों के नामांतरण किए जा रहे हैं, ये किराएदारी नियम का भी उल्लंघन है। मेयर के दबाव के कारण नगर आयुक्त ने नामांतरण से अपने को अलग कर दिया है। अब तक हुए नामांतरण की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच होनी चाहिए।
रवि जोशी पार्षद
नगर पालिका के समय से यह नियम चलता आ रहा है। उसके तहत नामांतरण किए जा रहे हैं। -विजेंद्र चौहान, सहायक नगर आयुक्त