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Ramnagar: 90 साल का सीटीआर...दहाड़, हरियाली और संरक्षण की विरासत, 2006 से 2022 तक 90% बढ़ी बाघों की तादाद

Sat, 08 Aug 2026 09:51 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर
अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर Published by: Heera Updated Sat, 08 Aug 2026 09:51 AM IST
सार

कॉर्बेट नेशनल पार्क शनिवार को अपने 90 वर्ष पूरे कर रहा है। आठ अगस्त 1936 को हेली नेशनल पार्क के रूप में शुरू हुआ कॉर्बेट का सफर आज कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के रूप में दुनिया भर में बाघ संरक्षण की मिसाल बन चुका है।

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Corbett National Park Ramnagar is completing 90 years
Jim Corbett National Park - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में अहम स्थान रखने वाला कॉर्बेट नेशनल पार्क शनिवार को अपने 90 वर्ष पूरे कर रहा है। आठ अगस्त 1936 को हेली नेशनल पार्क के रूप में शुरू हुआ कॉर्बेट का सफर आज कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के रूप में दुनिया भर में बाघ संरक्षण की मिसाल बन चुका है।

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को वर्ष 1973-74 में देश के पहले नौ टाइगर रिजर्वों में शामिल किया गया था। इसके बाद यहां बाघ संरक्षण पर लगातार काम हुआ। कैमरा ट्रैप और वैज्ञानिक आकलन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2006 में कॉर्बेट में 150 बाघ दर्ज किए गए थे जो 2010 में 184, 2014 में 215, 2018 में 231 और वर्ष 2022 में बढ़कर 266 हो गए। यानी 16 वर्षों में बाघों की संख्या करीब 90 प्रतिशत बढ़ी।

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323.75 वर्ग किमी से 1,288.31 वर्ग किमी में फैला सीटीआर
सीटीआर के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1936 में 323.75 वर्ग किमी से शुरू हुआ सफर आज 1,288.31 वर्ग किमी में फैल गया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 821.99 वर्ग किमी कोर और 466.32 वर्ग किमी बफर क्षेत्र शामिल है।

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संरक्षण के साथ पर्यटन बना पहचान
90 वर्षों में सीटीआर केवल वन्यजीव संरक्षण का केंद्र ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन की पहचान भी बन गया। हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां बाघ और अन्य वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी चुनौती बना हुआ है।

 

हाईटेक तकनीक की मदद से वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है। संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। वन्यजीवों का संरक्षण प्राथमिकता है। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर

 

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