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आचार संहिता के कारण कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाया कैबिनेट नोट
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हल्द्वानी। भाबर की लाइफ लाइन बहुउद्देश्यी जमरानी बांध परियोजना के बांध विस्थापितों के पुनर्वास का मामला लंबित होने से परियोजना का काम धीमी गति से चल रहा है। जमरानी बांध परियोजना इकाई ने नवंबर 2021 में पुनर्वास नीति का ड्राफ्ट तैयार कर दिया था लेकिन विधानसभा चुनाव की गहमागहमी और बाद में चुनाव आचार संहिता लगने से पुनर्वास नीति का ड्रफ्ट कैबिनेट की बैठक में नहीं आ सका। अब परियोजना के अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही पुनर्वास नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी। प्र
प्रस्तावित जमरानी बांध के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर तीन महकमों की स्वीकृति के बाद अब आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। जमरानी बांध विस्थापितों के लिए 400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। जिसमें 350 हेक्टेयर वन भूमि और 50 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। वन विभाग के बाद ग्रामीणों से जमीन ट्रांसफर को लेकर पूर्व में सहमति मिल चुकी है। इसके अलावा जमरानी से हल्द्वानी तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी कई स्थानों पर वन भूमि से होकर बिछाई जानी है। जमरानी परियोजना के जीएम प्रशांत विश्नोई ने बताया कि विस्थापन के लिए प्राग फार्म में चिन्हित जमीन राजस्व विभाग की होने से फाइल को एक बार राजस्व की अनुमति के लिए भेजा जाना है। ड्राफ्ट तैयार है, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के धनराशि उपलब्ध होगी।
226 परिवारों के लिए 320 एकड़ की जरूरत
किच्छा के प्राग फार्म में जमरानी क्षेत्र के 226 परिवारों को बसाया जाना है। जिसके लिए 320 एकड़ जमीन की जरूरत है। प्राग में जमीन की उपलब्धता है। ग्रामीणों के सुझावों को शामिल कर मास्टर प्लान तैयार हो रहा है। हर परिवार को एक एकड़ जमीन और 200 वर्ग मीटर आवासीय प्लाट मिलना है। स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान समेत अन्य सुविधाएं भी प्लान का हिस्सा है।
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प्रस्तावित जमरानी बांध के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर तीन महकमों की स्वीकृति के बाद अब आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। जमरानी बांध विस्थापितों के लिए 400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। जिसमें 350 हेक्टेयर वन भूमि और 50 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। वन विभाग के बाद ग्रामीणों से जमीन ट्रांसफर को लेकर पूर्व में सहमति मिल चुकी है। इसके अलावा जमरानी से हल्द्वानी तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी कई स्थानों पर वन भूमि से होकर बिछाई जानी है। जमरानी परियोजना के जीएम प्रशांत विश्नोई ने बताया कि विस्थापन के लिए प्राग फार्म में चिन्हित जमीन राजस्व विभाग की होने से फाइल को एक बार राजस्व की अनुमति के लिए भेजा जाना है। ड्राफ्ट तैयार है, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के धनराशि उपलब्ध होगी।
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226 परिवारों के लिए 320 एकड़ की जरूरत
किच्छा के प्राग फार्म में जमरानी क्षेत्र के 226 परिवारों को बसाया जाना है। जिसके लिए 320 एकड़ जमीन की जरूरत है। प्राग में जमीन की उपलब्धता है। ग्रामीणों के सुझावों को शामिल कर मास्टर प्लान तैयार हो रहा है। हर परिवार को एक एकड़ जमीन और 200 वर्ग मीटर आवासीय प्लाट मिलना है। स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान समेत अन्य सुविधाएं भी प्लान का हिस्सा है।
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