{"_id":"56fec45f4f1c1b5944f00124","slug":"condition-has-not-improved","type":"story","status":"publish","title_hn":"आकाश की हालत में नहीं हुआ सुधार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आकाश की हालत में नहीं हुआ सुधार
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र आकाश की हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उसकी सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। दूसरी ओर परिजनों ने शुक्रवार शाम हास्टल का कमरा देखा और मेडिकल चौकी में जाकर जानकारी ली। परिजनों को आकाश के साथ किसी अनहोनी का अंदेशा है मगर सवाल ये उठता है कि तीन दिन बाद भी परिजनों ने जांच के लिए पुलिस को तहरीर क्यों नहीं दी।
विज्ञापन
बुधवार तड़के मेडिकल कालेज में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र आकाश संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। आकाश को इलाज के लिए बृजलाल हास्पिटल में भर्ती कराया गया है। आकाश जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। आकाश को वेंटीलेटर पर रखा गया है और उसके 72 घंटे बाद भी होश नहीं आया है।
विज्ञापन
डा. अजय पाल ने बताया कि टैमरोप्राइटिल बोन फ्रेक्चर (दिमाग की हड्डी में फ्रेक्चर), दिमाग में खून के थक्के, ब्रेन में फ्रेक्चर के स्थान से एअर (हवा) घुसने के साथ ही दिमाग से पानी का रिसाव हो रहा है। कालर बोन भी टूट गई है। फेफड़ों में चोट, रीढ़ की हड्डी में फ्रेक्चर के साथ ही चोटें भी हैं। शरीर में अन्य स्थानों पर भी फ्रेक्चर हुआ है।
विज्ञापन
डा. पाल ने बताया कि आकाश को वेंटीलेटर पर ही है और उसे अभी तक होश नहीं आया है। आकाश के रिश्तेदार विशाल ने बताया कि आज उसके हाथ-पैर में कुछ मूवमेंट हुआ था। उन्होंने शाम को मेडिकल कालेज हास्टल पहुंचकर आकाश का रूम नंबर 41 भी देखा साथ ही उसके दोस्तों से भी बातचीत की।
विशाल ने पूछा कि किसी से आकाश का झगड़ा तो नहीं हुआ था। दोस्तों के चक्कर में किसी से कोई कहासुनी हुई हो। इसके बाद परिजन मेडिकल पुलिस चौकी पहुंचे और जानकारी ली। सवाल ये उठता है कि संदेह होने के बावजूद भी परिजनों ने जांच के लिए तहरीर क्यों नहीं दी।