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मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को इलाज की जरूरत
राजीव शुक्ला
Updated Sat, 27 Aug 2016 12:15 AM IST
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गरीबों के इलाज के लिए चल रही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को ही इलाज की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लगभग 1500 मरीजों के इलाज का सवा करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। भुगतान के चक्कर में संबंधित मेडिकल स्टोर से आवश्यक दवाएं और इम्प्लांट नहीं मिल पा रहे हैं।
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री ने गरीबों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। योजना तहत 50 हजार रुपये तक का आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) और पांच हजार रुपये का इलाज ओपीडी में करा सकते थे।
हालांकि, अब इस योजना में इलाज की राशि बढ़ा दी गई है। सुशीला तिवारी अस्पताल में जून 2015 से जुलाई 2016 तक लगभग सवा करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। 15 सौ मरीजों का इलाज होने के बाद अभी तक बीमा कंपनी से भुगतान नहीं हुआ है।
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सूत्रों की मानें तो भुगतान न होने के कारण एक मेडिकल स्टोर ने सामान देने से भी इंकार कर दिया था। हालात बिगड़ते देख मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने आलाधिकारियों से बात कर वास्तविक स्थिति बताई थी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाज शुरू होने के तुरंत बाद बीमा कंपनी से अनुमति ली जाती है। अनुमति लेने के लिए मरीज की आईडी और राशन कार्ड समेत फॉर्म दिल्ली भेजा जाता है।
इलाज की स्वीकृति आने के बाद पूरे क्लेम के लिए दोबारा से सारे दस्तावेज बीमा कंपनी को भेजे जाते हैं। इसमें बीएचटी (बेड हेड टिकट) और डिस्चार्ज सर्टिफिकेट भी शामिल है। क्लेम करने की तिथि से 21 दिन के भीतर बीमा कंपनी से क्लेम मिलने का प्रावधान है।
सौ क्लेम कर दिए रिजेक्ट
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। इलाज के पहले स्वीकृति मिलने के बाद बीमा कंपनी ने कई मामलों में क्लेम देने से मना कर दिया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे लगभग सौ मामले हैं। इन मामलों में बीमा कंपनी ने अलग-अलग कारण बताए हैं। बीएचटी या रिपोर्ट में एल्कोहल की बात सामने आने पर भी क्लेम नहीं दिया गया।
बजट न होने के कारण बीमा कंपनी को भुगतान नहीं हो सका था। बजट पास होने के बाद सभी विभागों को बजट का आवंटन किया गया। तीन दिन पहले बीमा कंपनी को भुगतान किया गया है। जल्द ही एसटीएच को क्लेम की धनराशि मिल जाएगी। एसटीएच प्रशासन की ओर से भी क्लेम के लिए भेजे गए दस्तावेजों में कमी थी।
क्लेम न मिलने का मामला मेरे संज्ञान में आया था। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों से बात हो गई है। जल्द ही क्लेम की राशि एसटीएच को मिल जाएगी।
कई बार इलाज का खर्च बढ़ जाता है। खर्च बढ़ने के कारण बीमा कंपनी से क्लेम मिलने में परेशानी होती है। एसटीएच के डाक्टरों के महंगी दवाएं लिखने के कारण भी ऐसा हो रहा है।
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री ने गरीबों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। योजना तहत 50 हजार रुपये तक का आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) और पांच हजार रुपये का इलाज ओपीडी में करा सकते थे।
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हालांकि, अब इस योजना में इलाज की राशि बढ़ा दी गई है। सुशीला तिवारी अस्पताल में जून 2015 से जुलाई 2016 तक लगभग सवा करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। 15 सौ मरीजों का इलाज होने के बाद अभी तक बीमा कंपनी से भुगतान नहीं हुआ है।
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सूत्रों की मानें तो भुगतान न होने के कारण एक मेडिकल स्टोर ने सामान देने से भी इंकार कर दिया था। हालात बिगड़ते देख मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने आलाधिकारियों से बात कर वास्तविक स्थिति बताई थी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाज शुरू होने के तुरंत बाद बीमा कंपनी से अनुमति ली जाती है। अनुमति लेने के लिए मरीज की आईडी और राशन कार्ड समेत फॉर्म दिल्ली भेजा जाता है।
इलाज की स्वीकृति आने के बाद पूरे क्लेम के लिए दोबारा से सारे दस्तावेज बीमा कंपनी को भेजे जाते हैं। इसमें बीएचटी (बेड हेड टिकट) और डिस्चार्ज सर्टिफिकेट भी शामिल है। क्लेम करने की तिथि से 21 दिन के भीतर बीमा कंपनी से क्लेम मिलने का प्रावधान है।
सौ क्लेम कर दिए रिजेक्ट
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। इलाज के पहले स्वीकृति मिलने के बाद बीमा कंपनी ने कई मामलों में क्लेम देने से मना कर दिया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे लगभग सौ मामले हैं। इन मामलों में बीमा कंपनी ने अलग-अलग कारण बताए हैं। बीएचटी या रिपोर्ट में एल्कोहल की बात सामने आने पर भी क्लेम नहीं दिया गया।
बजट न होने के कारण बीमा कंपनी को भुगतान नहीं हो सका था। बजट पास होने के बाद सभी विभागों को बजट का आवंटन किया गया। तीन दिन पहले बीमा कंपनी को भुगतान किया गया है। जल्द ही एसटीएच को क्लेम की धनराशि मिल जाएगी। एसटीएच प्रशासन की ओर से भी क्लेम के लिए भेजे गए दस्तावेजों में कमी थी।
-डा. हरीश चंद्र सिंह मर्तोलिया
कार्यक्रम अधिकारी मुख्यमंत्री स्वास्थ्यबीमा योजना
क्लेम न मिलने का मामला मेरे संज्ञान में आया था। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों से बात हो गई है। जल्द ही क्लेम की राशि एसटीएच को मिल जाएगी।
- डा. आशुतोष सयाना निदेशक, चिकित्सा-शिक्षा विभाग
कई बार इलाज का खर्च बढ़ जाता है। खर्च बढ़ने के कारण बीमा कंपनी से क्लेम मिलने में परेशानी होती है। एसटीएच के डाक्टरों के महंगी दवाएं लिखने के कारण भी ऐसा हो रहा है।
- डा. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज