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चिंता: मानसून में बदलाव से बदली नैनीताल में बारिश की तस्वीर, पांच साल में दिखा परिवर्तन

Mon, 28 Sep 2026 11:10 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Mon, 28 Sep 2026 11:10 AM IST
सार

नैनीताल में बढ़ते तापमान के कारण मानसून का चक्र बदल रहा है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां औसत सालाना बारिश करीब 3800 मिलीमीटर होती थी, अब घटकर 2100-2300 मिलीमीटर रह गई है। यानी बारिश की मात्रा में बड़ी कमी आई है।

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Change in monsoon changes the picture of rain in Nainital
नैनीताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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हिमालय में बढ़ते तापमान के साथ मानसून का मिजाज भी बदलता दिखाई दे रहा है। नैनीताल में पिछले पांच वर्षों में हुई बारिश के आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर सामने ला रहे हैं। एक दशक पहले जहां शहर में सालाना औसत बारिश करीब 3800 मिलीमीटर के आसपास रहती थी। हाल के वर्षों में यह घटकर करीब 2100 से 2300 मिलीमीटर के बीच रह गई है। यानी बारिश की कुल मात्रा में बड़ी कमी के साथ मानसून का पारंपरिक चक्र भी प्रभावित हुआ है।

 

मौसम में बदलाव का असर सिर्फ कुल बारिश की मात्रा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने और कम समय में अत्यधिक बारिश होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इससे प्राकृतिक जल स्रोतों में पर्याप्त पानी का संचयन नहीं हो पाता और दूसरी ओर अचानक तेज बारिश से भूस्खलन, जलभराव और मिट्टी के कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

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बर्फबारी और जल स्रोतों पर भी असर
लगातार बढ़ते तापमान का असर हिमालय की बर्फबारी और जल स्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। नैनीताल समेत पर्वतीय क्षेत्रों में कई पारंपरिक जल स्रोतों का स्तर घटा है। कुछ स्रोत सूख चुके हैं, जबकि बचे स्रोतों में भी पहले की तुलना में पानी कम होने की शिकायत सामने आती रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान बढ़ने से वायुमंडलीय और जल चक्र में बदलाव होना स्वाभाविक है। इससे मानसून की अवधि, बारिश की तीव्रता और उसके वितरण में परिवर्तन हो सकता है।

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तापमान बढ़ने के साथ रेनफॉल घटना स्वाभाविक है। वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग के संकेत बताते हैं कि अब बारिश कम होगी, लेकिन जब होगी तो कम समय में अधिक बारिश होने की संभावना रहेगी। वैश्विक तापमान में जहां करीब 1.5 डिग्री की वृद्धि हुई है, वहीं हिमालय में तापमान वृद्धि करीब तीन डिग्री तक बताई जा रही है। सीओ2 और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से हाइड्रोलॉजिकल साइकल का प्रभावित होना स्वाभाविक है - डॉ. नरेंद्र सिंह, मौसम वैज्ञानिक, एरीज

 

 

नैनीताल में वर्षवार हुई बारिश

2026 2191.00 मिमी.

2025 2019.00 मिमी.

2024 1847.00 मिमी.

2023 1675.00 मिमी.

2022 1178.00 मिमी.

2021 1334.00 मिमी.

मानूसन में पिछले साल से 374.6 मिमी कम बारिश
जिले में इस मानसून सीजन बारिश का मिजाज पिछले साल के मुकाबले काफी बदला हुआ रहा। जून में कम बारिश होने के बाद जुलाई में बादलों ने जमकर वर्षा की लेकिन अगस्त में बारिश का आंकड़ा अचानक गिर गया। सितंबर में भी पिछले साल के मुकाबले बारिश कम रही। जून से सितंबर तक जिले में 962.1 मिमी बारिश दर्ज हुई जबकि वर्ष 2025 में इसी अवधि में 1336.7 मिमी बारिश हुई थी। यानी इस साल अब तक 374.6 मिमी कम वर्षा हुई है।

पंतनगर कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अजीत नैन के अनुसार इस साल बारिश पूरी तरह कम नहीं हुई, बल्कि उसका वितरण असमान रहा। अलनीनो फैक्टर भी इसकी एक वजह है। पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह पर गर्म पानी आने के कारण ही बारिश का वितरण असमान रहा है।

 

महीने वार बारिश का आंकड़ा

माह - 2025 - 2026 - अंतर

जून -181.2 मिमी- 124 मिमी- 57.2 मिमी कम

जुलाई - 245.9 मिमी- 380.3 मिमी - 134.4 मिमी अधिक

अगस्त 571.6 मिमी- 255.9 मिमी- 315.7 मिमी कम

सितंबर- 338 मिमी- 322.1 मिमी- 16 मिमी कम

कुल- 1336.7 मिमी- 962.1 मिमी- 374.6 मिमी कम

 

 

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