फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Uttarakhand High Court reserves decision on appeal challenging death sentence

उत्तराखंड: तलवार से तीन की हत्या, फांसी की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा निर्णय

Tue, 29 Sep 2026 12:18 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Tue, 29 Sep 2026 12:18 AM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर निर्मम हत्या के आरोपी को निचली अदालत से मिली फांसी की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

विज्ञापन
Uttarakhand High Court reserves decision on appeal challenging death sentence
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने अपनी मां, बड़े भाई व गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर निर्मम हत्या करने के आरोपी को निचली अदालत की ओर से मिली फांसी की सजा को चुनौती देने वाली दायर अपील पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

विज्ञापन


मामले के अनुसार टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव निवासी संजय सिंह ने 13 दिसंबर 2014 को मामूली बात में अपनी मां, बड़े भाई व गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर हत्या कर दी थी। जिसकी रिपोर्ट आरोपी के पिता राम सिंह पवार ने दर्ज कराई थी। दोषी संजय सिंह को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने अगस्त 2021 में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ को न्याय मित्र नियुक्त कर आरोपी की ओर से बहस के लिए नियुक्त किया था। न्याय मित्र ने कोर्ट को बताया कि मृत्युदंड की सजा पाया आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
विज्ञापन


मेडिकल बोर्ड ने भी आरोपी को मानसिक रूप से बीमार बताते हुए कहा है कि वह अपने द्वारा किये जाने वाले कृत्य के परिणाम नहीं जानता है। लेकिन वह इलाज के बाद ठीक हो सकता है। किंतु निचली अदालत ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुना दी। सुनवाई पर राज्य सरकार ने एम्स के डाक्टरों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जिसमें कहा गया कि अभियुक्त को उसकी मानसिक स्थिति जानने के लिए एम्स के विशेषज्ञ डाक्टरों को दिखाया गया जहां उसकी मानसिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। वह बिना किसी सहायता के संवाद करने में सक्षम है। जबकि अभियुक्त कि तरफ से कहा गया कि घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति सही नही थी, ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाए जाने से पहले उसकी मानसिक स्थिति की जांच नही कराई गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed