फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Uttarakhand High Court expressed concern over the delay in submitting the report.

उत्तराखंड: रिपोर्ट समय पर न देने पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, राज्य पुलिस को निर्देश

Tue, 29 Sep 2026 12:27 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Tue, 29 Sep 2026 12:27 AM IST
सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों से जुड़ी रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य पुलिस को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं; यह आदेश आनंद प्रकाश धवन की याचिका पर दिया गया।

विज्ञापन
Uttarakhand  High Court expressed concern over the delay in submitting the report.
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

विज्ञापन

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों से जुड़ी रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने को लेकर चिंता जताते हुए राज्य पुलिस को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह आदेश आनंद प्रकाश धवन की याचिका पर दिए।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट के समक्ष राज्य के डीजीपी और गृह सचिव की ओर से दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि प्रदेश भर में 150 पुलिस अधिकारियों की एक इन्वेस्टिगेशन सेल गठित कर तैनात की गई है। भविष्य की आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था में पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। राज्य सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के जोगेन्दर कुमार बनाम उत्तरा प्रदेश सरकार और ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामलों में दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। लंबित विवेचनाओं की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए अधिकारियों को सर्कुलर भी जारी किए गए हैं।

विज्ञापन

रेप, पॉक्सो और एनडीपीएस मामलों की फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से रेप, पॉक्सो, एनडीपीएस और अन्य जघन्य अपराधों में फोरेंसिक रिपोर्ट में देरी के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट दाखिल करने की वैधानिक अवधि 90 या 60 दिन होने के अनुसार फोरेंसिक रिपोर्ट 75 और 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि मुकदमों के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक का दायित्व है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले संबंधित विवेचक को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। डीजीपी ने एसएसपी को निर्देश दिया है कि नमूने लिए जाने के एक सप्ताह के भीतर उन्हें फोरेंसिक लैब भेजा जाए। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में वैज्ञानिक अधिकारियों की संख्या भी 11 से बढ़ाकर 28 किए जाने की जानकारी कोर्ट को दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

हर शहर में नियमित प्रशिक्षण की सलाह
हाईकोर्ट ने डीजीपी को प्रत्येक शहर में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी है। इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों और ऐसे अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने को कहा गया है, जिन्हें मुकदमों के संचालन का व्यापक अनुभव है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर 2026 की तिथि नियत की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed