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दमुवाढूंगा की लड़ाई में कूदी भाजपा
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sun, 06 Nov 2016 10:43 PM IST
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दमुवाढूंगा की भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई में भाजपा के भी खुलकर कूद जाने से वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। चुनाव नजदीक है। वित्तमंत्री के अपनों (कांग्रेसियों) के अलावा राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों ने उनकी चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। बनभूलपुरा के बाद अब दमुवाढूंगा चुनावी मुद्दा बन गया है। दमुवाढूंगा की भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई में दमुवाढूंगा बचाओ संघर्ष समिति के बाद वित्तमंत्री की धुर विरोधी एवं हल्द्वानी से भाजपा की संभावित प्रत्याशी रेनू अधिकारी ने वित्तमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बनभूलपुरा और दमुवाढूंगा की जनता भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रही है। इस लड़ाई में वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश निशाने पर हैं। दोनों ही इलाके कांग्रेस के वोट बैंक हैं। बनभूलपुरा संघर्ष समिति की कमान कांग्रेस से जुड़े लोगों ने ही संभाली है। उधर, दमुवाढूंगा की कमान अब भाजपा ने अपने हाथों में ले ली है। दमुवाढूंगा की आबादी वन भूमि पर काबिज है। स्थानीय लोग दशकों से भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। करीब साल भर पहले सरकार ने दमुवाढूंगा को नगर निगम में शामिल कर लिया। स्थानीय लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिला।
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भूमि के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ने के लिए स्थानीय लोगों ने दमुवाढूंगा बचाओ संघर्ष समिति गठित की है। समिति शासन एवं प्रशासन पर लगातार दबाव बना रही है। इस बीच वित्तमंत्री के दबाव में प्रशासन भी हरकत में आया है और बंदोबस्ती के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शनिवार को डीएम ने स्थलीय निरीक्षण कर 10 दिन के भीतर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। डीएम के निरीक्षण के बाद भाजपा नेत्री एवं हल्द्वानी से भाजपा की प्रबल दावेदार रेनू अधिकारी ने दमुवाढूंगा के मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है।
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रेनू अधिकारी ने कहा कि दमुवाढूंगा की जनता को सिर्फ गुमराह किया जा रहा है। दिसंबर में आचार संहिता लागू होने की संभावना है। ऐसे में मालिकाना हक दिलाने का आश्वासन सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। रेनू अधिकारी ने कहा कि वित्तमंत्री सालों से राजपुरा, बनभूलपुरा, गांधीनगर, गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती के लोगों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने का आश्वासन देकर वोट बैंक की राजनीति करती आई हैं। अब दमुवाढूंगा के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा। मालिकाना हक की लड़ाई के लिए भाजपा स्थानीय लोगों के साथ सड़कों पर उतरेगी।