{"_id":"5730dd1e4f1c1b7d0a919f15","slug":"bimlal-retain-membership-application-in-the-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"भीमलाल की सदस्यता बरकरार रखने के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भीमलाल की सदस्यता बरकरार रखने के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Tue, 10 May 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने भाजपा के बागी विधायक भीमलाल आर्य की सदस्यता बरकरार रखने के स्पीकर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद भीमलाल आर्य को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तिथि नियत की है।
भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस आदेश को हाईकोर्ट में सोमवार को चुनौती दी, जिसमें भीमलाल आर्य की सदस्यता को बरकरार रखा था। याचिका में कहा था कि भीमलाल आर्य व्हिप के बावजूद सदन से 18 मार्च को गैरमौजूद रहे, जिसकी शिकायत को स्पीकर ने अनदेखा करते हुए उनकी सदस्यता बरकार रखी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भाजपा के मुख्य सचेतक (याचिकाकर्ता) मदन कौशिक की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कौशिक ने व्हिप के उल्लंघन का मामला बनाते हुए दल-बदल कानून के तहत भीमलाल आर्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी।
याचिका में कहा कि छह मार्च को व्हिप जारी किया गया था, फिर भी घनसाली विधायक भीमलाल आर्य ने उसे नहीं माना। 18 मार्च को भाजपा विधानमंडल दल ने वित्त विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग का निर्णय लिया था। इसमें भी वह शामिल नहीं हुए और सदन में नहीं आए। याचिका में यह भी कहा कि भीमलाल आर्य ने कांग्रेस का साथ देने की एवज में उस समय सरकार की ओर से दिए गए डा. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह समिति के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) पद को भी स्वीकार किया। उन्होंने न्यायालय को यह भी बताया कि भीमलाल आर्य ने खुद की पार्टी से निष्कासित मान लिया। इसलिए यह व्हिप का उल्लंघन है और यह दर्शाता है कि उन्होंने स्वेच्छा से सदस्यता छोड़ दी थी। इस प्रकरण पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने भाजपा विधायक को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तिथि तय की है।
भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस आदेश को हाईकोर्ट में सोमवार को चुनौती दी, जिसमें भीमलाल आर्य की सदस्यता को बरकरार रखा था। याचिका में कहा था कि भीमलाल आर्य व्हिप के बावजूद सदन से 18 मार्च को गैरमौजूद रहे, जिसकी शिकायत को स्पीकर ने अनदेखा करते हुए उनकी सदस्यता बरकार रखी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भाजपा के मुख्य सचेतक (याचिकाकर्ता) मदन कौशिक की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कौशिक ने व्हिप के उल्लंघन का मामला बनाते हुए दल-बदल कानून के तहत भीमलाल आर्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
याचिका में कहा कि छह मार्च को व्हिप जारी किया गया था, फिर भी घनसाली विधायक भीमलाल आर्य ने उसे नहीं माना। 18 मार्च को भाजपा विधानमंडल दल ने वित्त विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग का निर्णय लिया था। इसमें भी वह शामिल नहीं हुए और सदन में नहीं आए। याचिका में यह भी कहा कि भीमलाल आर्य ने कांग्रेस का साथ देने की एवज में उस समय सरकार की ओर से दिए गए डा. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह समिति के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) पद को भी स्वीकार किया। उन्होंने न्यायालय को यह भी बताया कि भीमलाल आर्य ने खुद की पार्टी से निष्कासित मान लिया। इसलिए यह व्हिप का उल्लंघन है और यह दर्शाता है कि उन्होंने स्वेच्छा से सदस्यता छोड़ दी थी। इस प्रकरण पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने भाजपा विधायक को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तिथि तय की है।
विज्ञापन