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बारदाने की कीमत भी नहीं हो रही वसूल

Mon, 03 Aug 2015 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/भीमताल (नैनीताल)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/भीमताल (नैनीताल)। Updated Mon, 03 Aug 2015 12:38 AM IST
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जिले के फल पट्टी क्षेत्र के फल उत्पादकों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है। पहले बेमौसमी बारिश ने उनकी कमर तोड़ी, अब मंडी में फलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि बारदाना, तुड़ान और ढुलान का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

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हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी उचित कीमत न मिलने से काश्तकार परेशान हैं। बताते चलें कि फल पट्टी क्षेत्र रामगढ़, धारी और ओखलकांडा में सेब, नाशपाती और आड़ूू की खासी पैदावार होती है।
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 धारी निवासी काश्तकार और भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह बिष्ट बताते हैं कि लकड़ी के एक खाली हाफकेस की कीमत 50 से 70 रुपये है जबकि फलों के तुड़ान और ढुलान के अलावा एजेंट, आढ़त खर्च और ट्रांसपोर्ट खर्च में प्रति हाफकेस 80-100 रूपये का खर्च आता है।
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मंडी तक पहुंचने पर एक हाफकेस में कम से कम 150 रूपये खर्च हो रहे हैं, जबकि मंडी में फैनी और राइमर समेत सेब की अन्य प्रजातियों के 10 किलो फलों से भरे हाफकेस का मूल्य 80 से 120 रूपये ही मिल रहा है। डेलीसस प्रजाति के सेब का हाफकेस 150-200 रुपये में बिक रहा है।

पोखराड़ निवासी किशन सिंह, गुनीगांव निवासी बीडीसी सदस्य प्रकाश सती, सरना निवासी घनानंद पोडियार, कौल निवासी देव सिंह, परबड़ा निवासी उमेद सिंह और सूपी निवासी फल उत्पादक सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि नाशपाती की एक पेटी को बगीचे से मंडी तक पहुंचने में कम से कम 140 रूपये खर्च हो रहा है जबकि मंडी में 20 किलोग्राम नाशपाती की पेटी का मूल्य महज 100 से 140 रूपये ही मिल रहा है।

 ऐसे में फल पट्टी के अधिकांश फल उत्पादकों ने फलों का तुड़ान ही बंद कर दिया है। उनका कहना है कि मौजूदा कीमत पर यदि वह फल मंडी भेज रहे हैं तो उन्हें मुनाफा होने के बजाए अपनी जेब से पैसा लगाना पड़ रहा है। काश्तकारों को उम्मीद है कि शायद दो चार दिन बाद भाव बढ़े तभी वह फलों का तुड़ान करेंगे।


भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट कहते हैं कि काश्तकारों को घाटे की स्थिति से उबारने के लिए जरूरी है कि सरकार मंडी समिति अथवा उद्यान विभाग के माध्यम से काश्तकारों को 50 फीसदी अनुदान पर बारदाना उपलब्ध कराए या फिर फल पट्टी क्षेत्र में स्थानीय फलों पर आधारित कोई ऐसा उद्योग स्थापित करे जिससे कि फलों की बर्बादी को रोका जा सके और लोगों को रोजगार प्राप्त हो।

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