उत्तराखंड: हाईकोर्ट का सरकार को झटका, किच्छा-सिरौली नगर पालिका चुनाव की मतगणना पर लगी रोक हटी
नैनीताल हाईकोर्ट ने नगरपालिका किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका में हुए चुनाव की मतगणना न करने के राज्य चुनाव आयोग और सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने नगरपालिका किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका में हुए चुनाव की मतगणना नही करने के राज्य चुनाव आयोग और सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयोग के मतगणना ना करने संबंधी आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि जब चुनाव हो गया है तो अब मतगणना पर रोक क्यों लगाई गई है, इसलिए मतगणना शीघ्र प्रारम्भ की जाए।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति अलोक महरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार किच्छा निवासी अलीना मलिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बीते दिनों हुए चुनाव की मतगणना करने की मांग की गयी थी। पूर्व तिथि में कोर्ट की एकलपीठ के समक्ष राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को अवगत कराया था कि दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया जायेगा। इसको लेकर आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। जबकि मतदान के बाद होने वाली मतगणना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा गया है। चुनाव आयोग की अधिसूचना के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तिथि नियत की थी। आज मतगणना को लेकर आयोग व राज्य सरकार के आदेश को याचिकाकर्ता की ओर से खंडपीठ में चुनौती दी गई।
बता दें कि कोर्ट के समक्ष किच्छा निवासी नईमुल हुसैन सहित कई अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाएं दायर कर कहा था कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आम जनता से आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया। याचिका में कहा कि सरकार किच्छा में नगर पालिका चुनाव टालना चाहती है। याचिका में यह भी कहा गया कि आरक्षण आवंटन नियमावली के तहत अध्यक्ष पदों की कुल संख्या के आधार पर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए, जबकि सरकार ने 43 पालिका अध्यक्ष पदों के आधार पर ही रोस्टर तय किया।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, पूर्व में सरकार ने किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों और गांवों को पालिका में शामिल किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बाद में सरकार ने इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया। इसके बाद चुनाव को लेकर विवाद सामने आया। कोर्ट के पूर्व आदेश के बाद किच्छा नगर पालिका के अध्यक्ष पद का आरक्षण भी तय कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं कराया गया। याचिका में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई थी, यही नहीं सरकार नव गठित सरौली कलां नगर पालिका का चुनाव भी नहीं कराया। उसमे में चुनाव कराने की मांग की गई थी।