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एथलीट नीलम का न घर बचा न निशानी 

Thu, 07 Jul 2016 01:04 AM IST
राजीव शुक्ला  हल्द्वानी।
राजीव शुक्ला  हल्द्वानी। Updated Thu, 07 Jul 2016 01:04 AM IST
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Athletes not save the home is not a sign of Sapphire
बस्तड़ी बादल फटने से भूस्खलन की घायल - फोटो : अमर उजाला

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बस्तड़ी की नीलम भट्ट ने शायद अपने जीवन में कई ऐसे पलों का सामना किया होगा, जब उसे अपनी क्षमताओं की हद को खींचकर अपने को साबितकरना पड़ा हो। एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर अपना सफर शुरू करने के मुहाने पर पहुंच चुकी नीलम ने कई प्रतिस्पर्धाओं में ऐसा किया होगा। पर, पहली जुलाई को उसका सामना प्रकृति के जानलेवा रूप से था। इस प्रतिस्पर्धा में भी उसने प्रकृति को पीछे छोड़ दिया।

बस्तड़ी में बादल फटने के बाद आए मलबे में दब जाने के बावजूद नीलम ने अपने आपको बचा लिया। सुशीला तिवारी अस्पताल में इस समय अपनी सांसों को सहेजने की कोशिश कर रही नीलम को नहीं पता कि उसने इस संघर्ष में क्या कुछ खोया। रुक-रुक कर टुकड़ों-टुकड़ों में बात कर रही नीलम आपदा की रात से उबर पाने और खुद को संभालने में जुटी हुई हैं। 
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आपदा की रात को याद कर नीलम सिहर उठती हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के एनस्थीसिया आईसीयू में भरती नीलम कुछ इशारों और कुछ अस्पष्ट से शब्दों में बात कर पा रही है। उसकी आंखों में अपने पति, बच्चों को लेकर कई तरह के सवाल हैं। जिनका साफ जवाब किसी के पास नहीं है। पति और बच्चे अभी तक लापता हैं। 
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नीलम के ही कु छ शब्द हैं जिनसे छनकर आपदा की रात का घटनाक्रम सामने आता है। बृहस्पतिवार रात करीब चार बजे बस्तड़ी में पहली स्लाइडिंग हुई। करीब आधे घंटे बाद स्लाइडिंग का पता चलने पर नीलम और परिजन पड़ोस के लोगों को बचाकर अपने घर पर ले आए। स्लाइडिंग होने की सूचना मिलते ही मदद को और लोग भी आ गए। सुबह करीब पांच बजे दूसरी स्लाइडिंग हुई। सुबह छह से 6:30 बजे के बीच बादल फट गया। देखते ही देखते नीलम का घर और सामान सब बह गया। बहाव मेें नीलम भी पांच सौ मीटर तक बह गई थीं, फिर भी हिम्मत नहीं हारी। मलबे में दबे होने के बावजूद अपने को बाहर निकालने का प्रयास किया। मलबे से हाथ बाहर निकालकर लोगों से मदद मांगी। लोग नीलम को खोजते हुए वहां तक पहुंचे। 

नीलम के भाई कमल ने बताया कि प्रदेश स्तर तक खेलने के बाद बहन नीलम का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ था। कुछ परेशानियों के चलते नीलम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने के लिए नहीं भेज सके। कमल ने बताया कि भांजी (08) और भांजे (06) का पता नहीं चल रहा है। नीलम के पति कृष्णानंद भट्ट कृषि विभाग में लिपिक के पद पर डीडीहाट में कार्यरत थे। उनका भी छह दिन बाद पता नहीं लग सका है। 

 
स्थिर है तीनों मरीजों की हालत 
 हल्द्वानी। बस्तड़ी की आपदा में घायल हुए नीलम भट्ट, मोहन चंद्र और मंजू भट्ट की हालत स्थिर है। सुशीला तिवारी अस्पताल के एमएस डॉ. एके पांडे ने बताया कि मोहन चंद्र को सर्जिकल आईसीयू और नीलम भट्ट को एनेस्थीसिया आईसीयू में रखा गया है। तीनों की हालत स्थिर है। नीलम के लीवर में चोट है और इलाज चल रहा है। 
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