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होनहारों ने अपनी प्रतिभा से मनवाया लोहा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 01:15 AM IST
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Arpit, mayank, garima and rijul cleared UPSC's civil services exam.
रिजुल यूपीएससी में 322वीं रैंक। - फोटो : KASHIPUR
सिविल सेवा परीक्षा : जसपुर के अर्पित ने पाई 20वीं रैंक
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तीसरे प्रयास में हुए, पहले प्रयास में नहीं मिली कोई रैंक
दूसरे में आई 297वीं रैंक, पिता प्रधानाध्यापक, मां हैं प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
जसपुर (ऊधमसिंह नगर)। नगर के मोहल्ला चमन बाग कॉलोनी निवासी अर्पित चौहान ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 20वां स्थान प्राप्त किया है। उनके माता-पिता दोनों टीचर हैं।
अर्पित के पिता बलकरन सिंह राजकीय प्राथमिक विद्यालय सूत मिल में प्रधानाध्यापक हैं। उनकी मां अनीता चौहान जीजीआईसी में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं। अर्पित ने बताया कि उन्होंने मारिया स्कूल काशीपुर से इंटरमीडिएट किया था। इसके बाद पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से बीटेक किया। बीटेक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी थी। पहले प्रयास में उनकी कोई रैंक नहीं आई। दूसरे में उनकी 297वीं रैंक आई। इस रैंक पर उनका आईडीएएस में चयन हुआ था। वह आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने तीसरी बार प्रयास किया। तीसरे प्रयास में उसकी 20वीं रैंक आई है।
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अर्पित ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। अर्पित चौहान की एक बड़ी बहन अंकिता चौहान हैं, उन्होंने भी पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से एमटेक किया था। वर्तमान में वह प्राइवेट सेक्टर में मुंबई में नौकरी कर रही हैं।
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अर्पित की इस उपलब्धि पर उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। बधाई देने वालों में विधायक आदेश चौहान, पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, अजय अग्रवाल, तरुण गहलोत, अमित त्यागी, मनोज शर्मा, भूपेंद्र सिंह, गीता चौहान, मनमीत शर्मा, विनय चौहान, डॉ. सुदेश, केजी पाठक, आसाराम चौधरी आदि शामिल है।
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सफलता के टिप्स
अर्पित चौहान ने कहा कि छात्र-छात्राएं निर्णय जल्दी लेने की आदत डालें। लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करें। पूरे वर्ष के सिलेबस को महीने, सप्ताह और दिन के हिसाब से बांट लें। उसके बाद पढ़ाई करें। किसी परीक्षा में अगर सफल नहीं हुए तो निराश न हों। फिर से पूरे जोश के साथ परीक्षा की तैयारी करें। अपने मनोबल को बनाए रखें।
सिविल सर्विसेज परीक्षा में कफलेट के मयंक की 132वीं रैंक
पंतनगर। ग्राम कफलेत दशौली जिला पिथौरागढ़ निवासी स्व. ईश्वरीदत्त पाठक के प्रतिभाशाली पौत्र मयंक पाठक ने सिविल सेवा 2021 की परीक्षा में 132वां स्थान हासिल कर पाठक परिवार सहित क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। मयंक के चाचा डॉ. भुवन चंद्र पाठक वर्तमान में कैंपस स्कूल पंतनगर में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।
मयंक ने बताया कि प्रारंभिक से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा बनारस में प्रथम श्रेणी में पास की थी। इसके बाद आईआईटी कानपुर से बीटेक में डिग्री लेकर सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वह पहले व दूसरे प्रयास में असफलता के बाद भी निराश न होकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति में लगे रहे। उन्होंने तीसरे प्रयास में 132वीं रैंक हासिल कर उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की। तीक्ष्ण बुद्धि और लगनशील मयंक पढ़ाई के अलावा खेलकूद, भाषण, काव्य रचना आदि में भी निपुण हैं। वह प्रतिदिन सात से आठ घंटे किताबों के साथ ही व्यतीत करते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों व परिजनों को दिया है। इसके अलावा नियमित दिनचर्या के बीच कठिन परिश्रम को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया है। मयंक के पिता डॉ. हरिश्चंद्र पाठक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गणित के वरिष्ठ प्राध्यापक और माता महिमा पाठक अध्यापिका हैं। उनके ताऊ तारादत्त पाठक अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी रहे हैं और मुख्य सचिव से सेवानिवृत्त हुए हैं। संवाद
गरिमा ने तीसरे प्रयास में बढ़ाई गरिमा
यूपीएससी की परीक्षा में आई 304वीं रैंक, आईआरएस और आईएफएस में से एक को चुनना चाहती हैं रुद्रपुर की बेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में रुद्रपुर की एलाइंस कॉलोनी निवासी गरिमा नागपाल ने देश में 304वां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्हें तीसरे प्रयास में यह सफलता मिली है। बेटी की इस उपलब्धि पर परिवार वालों को दिनभर बधाइयां मिलती रहीं।
गरिमा ने बताया कि हल्द्वानी, कालाढूंगी, बाजपुर, रुद्रपुर और लखनऊ में उनकी पढ़ाई पूरी हुई। नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने आरएएन पब्लिक स्कूल बिलासपुर से की। इसके बाद लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बीए एलएलबी किया। गरिमा ने बताया कि उनके पिता प्रेम नागपाल वर्तमान में ऊधमसिंह नगर दुग्ध संघ खटीमा में प्रबंधक के पद पर तैनात हैं। उनकी नौकरी के दौरान स्थानांतरण के चलते उन्हें पढ़ाई के दौरान कई स्कूल बदलने पड़े थे। नौवीं में पहुंचने के बाद उन्होंने एक ही स्कूल से पढ़ाई करने का निर्णय लिया। वह आईआरएस (भारतीय राजस्व सेवा) और आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) में से एक को चुनना चाहती हैं। गरिमा की माता सुनीता नागपाल बुनाई का ऑनलाइन बिजनेस करती हैं। छोटा भाई मयंक नागपाल कंप्यूटर इंजीनियर है। पिता प्रेम नागपाल ने बताया कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर थी और स्कूल में उसे काफी पुरस्कार मिलते थे। हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में उसने अपने स्कूल में टॉप रही। 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जिले में दूसरे स्थान पर रही।
सफलता का मंत्र
पहले और दूसरे प्रयास में प्री निकालने के बाद मेन में रह जाने से मनोबल नहीं टूटा। मेहनत की। आठ घंटे नियमित पढ़ाई की। कोरोना काल में नोट्स नहीं मिले तो अखबार और मोबाइल मददगार बने।
युवाओं के लिए संदेश
नौकरी के लिए विदेश जाने के बजाय अपने ही देश की सेवा का जज्बा होना चाहिए। यहां सिविल सेवा और पब्लिक सेक्टर में काम की अपार संभावनाएं हैं।
बाजपुर के रिजुल ने बढ़ाया मान, पाई 322वीं रैंक
पिता हल्द्वानी में डीएफओ हैं
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी/बाजपुर। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बाजपुर जीजीआईसी के पास वार्ड नंबर 12 निवासी और हल्द्वानी में तैनात डीएफओ बाबू लाल के पुत्र रिजुल ने 322वी रैंक हासिल की है। रिजुल ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। इससे पूर्व उन्होंने वर्ष-2019 में 702वीं और 2020 में 706वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में वह इंडियन डिफेंस अकाउंट सर्विसेज की ट्रेनिंग के लिए गए हुए हैं।
रिजुल बोले-आईपीएस बन देश सेवा करना है सपना
काशीपुर/बाजपुर। यूपीएससी में ऑल इंडिया 322वीं रैंक लाने वाले बाजपुर निवासी रिजुल इस बार आई अपनी रैंक से पूरी तरह संतुष्ट हैं। रिजुल ने कहा कि उनका सपना आईपीएस बनकर देश सेवा करने का है। उन्होंने अपने परिजनों से जो वादा किया था, उसे उन्होंने पूरा कर दिखाया है। रिजुल ने बताया कि हाईस्कूल तक उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट मेरी स्कूल से की थी। इसके बाद उन्होंने इंटर मदर इंडिया पब्लिक स्कूल से उत्तीर्ण की। इंटर करने के बाद चार साल एनआईटी जयपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। रिजुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व परिजनों को दिया है। वहीं उनकी इस सफलता पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

रिजुल के टिप्स
रिजुल ने बताया कि अगर हर रोज आठ घंटे तक मनोयोग के साथ पढ़ाई की जाए तो सफलता निश्चित मिलती है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ थोड़ा बहुत मनोरंजन भी जरूरी है। बताया कि वह कुछ समय दोस्तों से बातचीत करते थे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन भी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए वर्तमान में काफी मैटर है। यह एक अच्छा माध्यम है। इससे भी तैयारियों में मदद मिलती है पर इसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों को अखबार जरूर पढ़ना चाहिए।

अपने माता-पिता व भाई के साथ गरिमा नागपाल।

अपने माता-पिता व भाई के साथ गरिमा नागपाल।- फोटो : RUDRAPUR

मयंक पाठक।

मयंक पाठक।- फोटो : RUDRAPUR

जसपुर के अर्पित चौहान और उसकी माता अनीता चौहान व पिता बलकरन सिंह के साथ। संवाद

जसपुर के अर्पित चौहान और उसकी माता अनीता चौहान व पिता बलकरन सिंह के साथ। संवाद- फोटो : KASHIPUR

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