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नैनीताल हाईकोर्ट का सख्त रुख: तथ्य छिपाकर दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज, लगाया पचास हजार का जुर्माना

Tue, 29 Sep 2026 12:09 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Tue, 29 Sep 2026 12:09 AM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व में दाखिल याचिका और उसमें पारित आदेश का तथ्य छिपाकर दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे न्यायालय को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास मानते हुए आवेदक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

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Anticipatory bail application filed by concealing facts dismissed
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व में दाखिल याचिका और उसमें पारित आदेश के तथ्य को छिपाकर दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे न्यायालय को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास मानते हुए आवेदक पर 50 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है।

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न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार भगवानपुर हरिद्वार निवासी समीर ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि उसे अग्रिम जमानत दी जाए। जिस पर राज्य सरकार की ओर से लिखित निर्देशों के आधार पर न्यायालय को बताया गया कि अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने से पहले आवेदक ने आपराधिक रिट याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग थी। उस याचिका में आवेदक ने न्यायालय के समक्ष यह वचन दिया था कि वह 20 मई 2026 तक या उससे पूर्व संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण कर देगा।

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सरकार की ओर से कहा गया कि आवेदक ने ना तो न्यायालय को दिए गए इस वचन का पालन किया, बल्कि इसके विपरीत पूर्व की याचिका और उसमें पारित आदेश के तथ्य को जानबूझकर छिपाते हुए अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर दी। इसलिए इसकी अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करने योग्य है। न्यायालय ने कहा कि आवेदक का आचरण न्यायालय को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए आवेदक को 50 हजार रूपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि चार सप्ताह के भीतर उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करने के निर्देश दिए गए।

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